Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
कथन I: भारत में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन प्रति व्यक्ति 0.5 टन CO₂ से कम है।
कथन II: ईंधन दहन से होने वाले CO₂ उत्सर्जन के संदर्भ में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है।
कथन III: विद्युत और ऊष्मा उत्पादक भारत में CO₂ उत्सर्जन के सबसे बड़े स्रोत हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल I और III
केवल II
केवल II और III
I, II और III
Correct Answer: C
Detailed Solution
यह प्रश्न कुल राष्ट्रीय उत्सर्जन, प्रति व्यक्ति उत्सर्जन और क्षेत्रवार उत्सर्जन—तीन अलग-अलग अवधारणाओं का परीक्षण करता है।
कथन I गलत है: भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन 0.5 टन से कम नहीं है।
प्रश्न से संबंधित आँकड़ों में भारत का प्रति व्यक्ति CO₂ उत्सर्जन लगभग 2 टन के आसपास था, यद्यपि यह अनेक विकसित देशों और वैश्विक औसत की तुलना में कम था।
बड़ी जनसंख्या के कारण किसी देश का कुल उत्सर्जन बहुत अधिक हो सकता है, भले ही उसका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन तुलनात्मक रूप से कम हो।
इसलिए ‘अन्य देशों की तुलना में कम प्रति व्यक्ति उत्सर्जन’ और ‘0.5 टन से कम उत्सर्जन’ को समान नहीं समझना चाहिए।
कथन II सही है: ईंधन दहन से होने वाले कुल CO₂ उत्सर्जन के संदर्भ में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है।
भारत के कुल उत्सर्जन में कोयला आधारित बिजली उत्पादन, उद्योग, परिवहन और अन्य ऊर्जा-संबंधी गतिविधियों का योगदान है।
भारत की बड़ी जनसंख्या, बढ़ती अर्थव्यवस्था और ऊर्जा की विशाल माँग के कारण उसका कुल उत्सर्जन उच्च है।
यह स्थिति भारत के कुल उत्सर्जन को ऊँचा बनाती है, जबकि उसका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन अनेक उच्च-आय वाले देशों से कम रह सकता है।
कथन III सही है: भारत में बिजली और ऊष्मा उत्पादन CO₂ उत्सर्जन का सबसे बड़ा क्षेत्रीय स्रोत है।
भारत की विद्युत व्यवस्था में कोयले का महत्त्वपूर्ण स्थान है और कोयला प्रति इकाई ऊर्जा के लिए अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करने वाला जीवाश्म ईंधन है।
ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले तथा अन्य जीवाश्म ईंधनों के दहन से बड़े स्तर पर CO₂ उत्पन्न होती है।
उद्योग और परिवहन भी प्रमुख उत्सर्जन-स्रोत हैं, लेकिन बिजली और ऊष्मा उत्पादन का योगदान उनसे अधिक है।
नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, ऊर्जा-दक्षता, भंडारण, विद्युत ग्रिड का आधुनिकीकरण और कम-कार्बन ईंधन इस क्षेत्र के उत्सर्जन को कम करने में महत्त्वपूर्ण हैं।
औद्योगिक प्रक्रियाओं और भूमि-उपयोग परिवर्तन से होने वाले उत्सर्जन को ईंधन दहन से होने वाले CO₂ उत्सर्जन से अलग समझना चाहिए।