Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
कथन I: जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 की संधारणीय विकास और जलवायु परिवर्तन से संबंधित वैश्विक चर्चाओं में बार-बार चर्चा होती है।
कथन II: जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते का अनुच्छेद 6 कार्बन बाजारों के सिद्धांत निर्धारित करता है।
कथन III: जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 का उद्देश्य देशों के बीच गैर-बाजार रणनीतियों को बढ़ावा देना है, ताकि वे अपने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
कथन II और कथन III दोनों सही हैं तथा दोनों कथन I की व्याख्या करते हैं।
कथन II और कथन III दोनों सही हैं, किन्तु उनमें से केवल एक कथन I की व्याख्या करता है।
कथन II और कथन III में से केवल एक सही है और वह कथन I की व्याख्या करता है।
न तो कथन II और न ही कथन III सही है।
Correct Answer: A
Detailed Solution
कथन I सही है: पेरिस समझौते का अनुच्छेद 6 देशों को अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों को लागू करने और जलवायु महत्त्वाकांक्षा बढ़ाने के लिए स्वैच्छिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की व्यवस्था प्रदान करता है।
अनुच्छेद 6 में बाजार-आधारित और गैर-बाजार—दोनों प्रकार की सहयोगात्मक व्यवस्थाएँ सम्मिलित हैं।
इसी व्यापक क्षेत्र के कारण अनुच्छेद 6 की जलवायु परिवर्तन, संधारणीय विकास, कार्बन व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से संबंधित वार्ताओं में लगातार चर्चा होती है।
कथन II सही है: अनुच्छेद 6 कार्बन बाजारों और देशों के बीच उत्सर्जन-कटौती परिणामों के हस्तांतरण की मूल व्यवस्था निर्धारित करता है।
अनुच्छेद 6.2 देशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तांतरित शमन परिणामों का उपयोग करते हुए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अनुमति देता है।
इन परिणामों को एक देश अपने जलवायु लक्ष्य की पूर्ति के लिए दूसरे देश को हस्तांतरित कर सकता है।
इस व्यवस्था में मजबूत लेखांकन और संगत समायोजन आवश्यक होते हैं, ताकि एक ही उत्सर्जन-कटौती को दो देश अपने-अपने लक्ष्य में न गिनें।
अनुच्छेद 6.4 संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में एक अंतरराष्ट्रीय कार्बन-क्रेडिट व्यवस्था स्थापित करता है।
इसके अंतर्गत उत्सर्जन कम करने अथवा ग्रीनहाउस गैसों को हटाने वाली परियोजनाओं से सत्यापित क्रेडिट उत्पन्न किए जा सकते हैं।
इसलिए कथन II अनुच्छेद 6 पर वैश्विक चर्चा का एक महत्त्वपूर्ण कारण बताता है और कथन I की व्याख्या करता है।
कथन III सही है: अनुच्छेद 6.8 देशों के लिए गैर-बाजार दृष्टिकोणों को मान्यता देता है।
गैर-बाजार दृष्टिकोण में कार्बन क्रेडिट का व्यापार अनिवार्य नहीं होता।
इनमें जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी सहयोग, क्षमता निर्माण, अनुकूलन, ऊर्जा-दक्षता और संस्थागत सहयोग जैसी व्यवस्थाएँ सम्मिलित हो सकती हैं।
इनका उद्देश्य शमन और अनुकूलन की महत्त्वाकांक्षा बढ़ाना, सार्वजनिक तथा निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करना और संधारणीय विकास में सहायता करना है।
इसलिए कथन III भी अनुच्छेद 6 के अंतरराष्ट्रीय महत्त्व और उसकी बार-बार होने वाली चर्चा की व्याख्या करता है।
अनुच्छेद 6 के बाजार तंत्र उत्सर्जन-कटौती की लागत कम कर सकते हैं, लेकिन पर्यावरणीय अखंडता और मानवाधिकार सुरक्षा के बिना इनमें दोहरी गणना तथा निम्न-गुणवत्ता वाले क्रेडिट का जोखिम हो सकता है।