JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ENVIRONMENT · 2025

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

कथन I: 28वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP28) में भारत ने ‘जलवायु और स्वास्थ्य संबंधी घोषणा’ पर हस्ताक्षर नहीं किए।

कथन II: जलवायु और स्वास्थ्य संबंधी COP28 घोषणा एक बाध्यकारी घोषणा है; और हस्ताक्षर कर दिए जाने पर स्वास्थ्य क्षेत्र को कार्बन-विहीन करना अनिवार्य हो जाता है।

कथन III: यदि भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को कार्बन-विहीन किया जाता है, तो इसकी स्वास्थ्य-देखभाल प्रणाली की आघात-सहनीयता से समझौता हो सकता है।

उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

A.

कथन II और कथन III दोनों सही हैं तथा दोनों कथन I की व्याख्या करते हैं।

B.

कथन II और कथन III दोनों सही हैं, किन्तु उनमें से केवल एक कथन I की व्याख्या करता है।

C.

कथन II और कथन III में से केवल एक सही है और वह कथन I की व्याख्या करता है।

D.

न तो कथन II और न ही कथन III सही है।

Correct Answer: C

Detailed Solution

  • कथन I सही है: दुबई में आयोजित COP28 के दौरान प्रस्तुत ‘जलवायु और स्वास्थ्य संबंधी घोषणा’ पर भारत ने हस्ताक्षर नहीं किए थे।

  • इस घोषणा का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को जलवायु नीतियों के केंद्र में लाना और अधिक जलवायु-सहनीय स्वास्थ्य प्रणालियों को प्रोत्साहित करना था।

  • घोषणा में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न अत्यधिक गर्मी, वायु प्रदूषण, संक्रामक रोग, खाद्य असुरक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना पर पड़ने वाले प्रभावों को मान्यता दी गई।

  • कथन II गलत है: जलवायु और स्वास्थ्य संबंधी COP28 घोषणा कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि नहीं, बल्कि एक गैर-बाध्यकारी राजनीतिक प्रतिबद्धता है।

  • घोषणा पर हस्ताक्षर करने से किसी देश पर अपने स्वास्थ्य क्षेत्र को तत्काल और अनिवार्य रूप से पूर्णतः कार्बन-विहीन करने का कानूनी दायित्व लागू नहीं होता।

  • यह देशों को कम-कार्बन, जलवायु-सहनीय और पर्यावरण की दृष्टि से सतत स्वास्थ्य-प्रणालियों की दिशा में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

  • प्रत्येक देश अपने राष्ट्रीय संसाधनों, विकास-आवश्यकताओं और स्वास्थ्य-व्यवस्था की परिस्थितियों के अनुसार कार्यवाही निर्धारित कर सकता है।

  • इसलिए कथन II में प्रयुक्त ‘बाध्यकारी’ और ‘अनिवार्य’ दोनों दावे गलत हैं।

  • कथन III सही है: भारत ने चिंता व्यक्त की थी कि स्वास्थ्य क्षेत्र को तेजी से कार्बन-विहीन करने की प्रतिबद्धता उसकी स्वास्थ्य-व्यवस्था की आघात-सहनीयता और सेवा-क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

  • अस्पतालों में निरंतर बिजली, शीतलन, टीका और औषधि शीत-शृंखला, ऑक्सीजन उत्पादन तथा आपातकालीन सेवाएँ आवश्यक होती हैं।

  • भारत जैसे गर्म और जलवायु-विविध देश में अस्पतालों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए विश्वसनीय शीतलन जीवन-रक्षक सेवा हो सकती है।

  • पर्याप्त स्वच्छ ऊर्जा, भंडारण और वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध हुए बिना जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा को तेजी से हटाने पर स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

  • दूरस्थ और अपर्याप्त सेवा वाले क्षेत्रों में ऊर्जा की उपलब्धता पहले से सीमित होने के कारण यह जोखिम अधिक हो सकता है।

  • भारत की चिंता स्वास्थ्य क्षेत्र के जलवायु-अनुकूलन का विरोध नहीं, बल्कि उत्सर्जन में कमी और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाओं के बीच संतुलन से संबंधित थी।

  • स्वास्थ्य क्षेत्र के सुव्यवस्थित डीकार्बोनाइज़ेशन में ऊर्जा-दक्ष भवन, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी बैकअप, स्वच्छ परिवहन और कम उत्सर्जन वाली चिकित्सा आपूर्ति-शृंखला सम्मिलित हो सकती है।

  • ऐसी नियोजित प्रक्रिया दीर्घकाल में स्वास्थ्य-व्यवस्था की आघात-सहनीयता बढ़ा सकती है; चिंता मुख्यतः अपर्याप्त सहायता के साथ किए जाने वाले तीव्र परिवर्तन को लेकर थी।

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