Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
कथन I: 28वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP28) में भारत ने ‘जलवायु और स्वास्थ्य संबंधी घोषणा’ पर हस्ताक्षर नहीं किए।
कथन II: जलवायु और स्वास्थ्य संबंधी COP28 घोषणा एक बाध्यकारी घोषणा है; और हस्ताक्षर कर दिए जाने पर स्वास्थ्य क्षेत्र को कार्बन-विहीन करना अनिवार्य हो जाता है।
कथन III: यदि भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को कार्बन-विहीन किया जाता है, तो इसकी स्वास्थ्य-देखभाल प्रणाली की आघात-सहनीयता से समझौता हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
कथन II और कथन III दोनों सही हैं तथा दोनों कथन I की व्याख्या करते हैं।
कथन II और कथन III दोनों सही हैं, किन्तु उनमें से केवल एक कथन I की व्याख्या करता है।
कथन II और कथन III में से केवल एक सही है और वह कथन I की व्याख्या करता है।
न तो कथन II और न ही कथन III सही है।
Correct Answer: C
Detailed Solution
कथन I सही है: दुबई में आयोजित COP28 के दौरान प्रस्तुत ‘जलवायु और स्वास्थ्य संबंधी घोषणा’ पर भारत ने हस्ताक्षर नहीं किए थे।
इस घोषणा का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को जलवायु नीतियों के केंद्र में लाना और अधिक जलवायु-सहनीय स्वास्थ्य प्रणालियों को प्रोत्साहित करना था।
घोषणा में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न अत्यधिक गर्मी, वायु प्रदूषण, संक्रामक रोग, खाद्य असुरक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना पर पड़ने वाले प्रभावों को मान्यता दी गई।
कथन II गलत है: जलवायु और स्वास्थ्य संबंधी COP28 घोषणा कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि नहीं, बल्कि एक गैर-बाध्यकारी राजनीतिक प्रतिबद्धता है।
घोषणा पर हस्ताक्षर करने से किसी देश पर अपने स्वास्थ्य क्षेत्र को तत्काल और अनिवार्य रूप से पूर्णतः कार्बन-विहीन करने का कानूनी दायित्व लागू नहीं होता।
यह देशों को कम-कार्बन, जलवायु-सहनीय और पर्यावरण की दृष्टि से सतत स्वास्थ्य-प्रणालियों की दिशा में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
प्रत्येक देश अपने राष्ट्रीय संसाधनों, विकास-आवश्यकताओं और स्वास्थ्य-व्यवस्था की परिस्थितियों के अनुसार कार्यवाही निर्धारित कर सकता है।
इसलिए कथन II में प्रयुक्त ‘बाध्यकारी’ और ‘अनिवार्य’ दोनों दावे गलत हैं।
कथन III सही है: भारत ने चिंता व्यक्त की थी कि स्वास्थ्य क्षेत्र को तेजी से कार्बन-विहीन करने की प्रतिबद्धता उसकी स्वास्थ्य-व्यवस्था की आघात-सहनीयता और सेवा-क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
अस्पतालों में निरंतर बिजली, शीतलन, टीका और औषधि शीत-शृंखला, ऑक्सीजन उत्पादन तथा आपातकालीन सेवाएँ आवश्यक होती हैं।
भारत जैसे गर्म और जलवायु-विविध देश में अस्पतालों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए विश्वसनीय शीतलन जीवन-रक्षक सेवा हो सकती है।
पर्याप्त स्वच्छ ऊर्जा, भंडारण और वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध हुए बिना जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा को तेजी से हटाने पर स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
दूरस्थ और अपर्याप्त सेवा वाले क्षेत्रों में ऊर्जा की उपलब्धता पहले से सीमित होने के कारण यह जोखिम अधिक हो सकता है।
भारत की चिंता स्वास्थ्य क्षेत्र के जलवायु-अनुकूलन का विरोध नहीं, बल्कि उत्सर्जन में कमी और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाओं के बीच संतुलन से संबंधित थी।
स्वास्थ्य क्षेत्र के सुव्यवस्थित डीकार्बोनाइज़ेशन में ऊर्जा-दक्ष भवन, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी बैकअप, स्वच्छ परिवहन और कम उत्सर्जन वाली चिकित्सा आपूर्ति-शृंखला सम्मिलित हो सकती है।
ऐसी नियोजित प्रक्रिया दीर्घकाल में स्वास्थ्य-व्यवस्था की आघात-सहनीयता बढ़ा सकती है; चिंता मुख्यतः अपर्याप्त सहायता के साथ किए जाने वाले तीव्र परिवर्तन को लेकर थी।