Previous Year Question
भारत में निम्नलिखित में से किस एक प्रकार के संरक्षित क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को जैव मात्रा एकत्र करने और उसका उपयोग करने की अनुमति नहीं है?
जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र
राष्ट्रीय उद्यान
रामसर अभिसमय के अंतर्गत घोषित आर्द्रभूमियाँ
वन्यजीव अभयारण्य
Correct Answer: B
Detailed Solution
राष्ट्रीय उद्यानों में वन्यजीवों, वनस्पतियों और प्राकृतिक पर्यावास को अपेक्षाकृत कठोर कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाता है।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत राष्ट्रीय उद्यान की सीमा में वन्यजीव अथवा वन-उपज को नष्ट करना, हटाना या उसका दोहन करना सामान्यतः निषिद्ध है।
राष्ट्रीय उद्यान से ईंधन की लकड़ी, चारा, घास और लघु वनोपज जैसी जैव मात्रा का नियमित संग्रह तथा उपयोग करने की अनुमति स्थानीय लोगों को नहीं होती।
राष्ट्रीय उद्यान के भीतर पशुओं की चराई भी सामान्यतः प्रतिबंधित होती है।
केवल राष्ट्रीय उद्यान के बेहतर प्रबंधन और अधिनियम में निर्धारित सक्षम अनुमति के अंतर्गत ही सीमित हस्तक्षेप किया जा सकता है।
राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने से पहले भूमि और संसाधनों पर विद्यमान अधिकारों की पहचान तथा निपटान की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
वन्यजीव अभयारण्य में संरक्षण का स्तर उच्च होता है, लेकिन विधि और प्रबंधन-योजना के अधीन कुछ पहले से मान्य स्थानीय अधिकार अथवा नियंत्रित गतिविधियाँ जारी रह सकती हैं।
अभयारण्य में चराई और संसाधन-संग्रह को विनियमित, सीमित या निषिद्ध किया जा सकता है, लेकिन प्रत्येक अभयारण्य में राष्ट्रीय उद्यान जैसा पूर्ण सामान्य प्रतिबंध अनिवार्य नहीं होता।
जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र सामान्यतः कोर, बफर और संक्रमण क्षेत्रों में विभाजित होता है।
कोर क्षेत्र में कठोर संरक्षण होता है, जबकि बफर और संक्रमण क्षेत्रों में अनुसंधान, शिक्षा तथा स्थानीय समुदायों द्वारा संसाधनों के सतत उपयोग की अनुमति दी जा सकती है।
इसलिए पूरे जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र में स्थानीय लोगों द्वारा जैव मात्रा के उपयोग पर एकसमान पूर्ण प्रतिबंध नहीं होता।
रामसर स्थल अंतरराष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि होती है और उनका प्रबंधन ‘विवेकपूर्ण उपयोग’ के सिद्धांत पर किया जाता है।
केवल रामसर स्थल घोषित हो जाने से स्थानीय लोगों द्वारा जैव मात्रा संग्रह पर स्वतः पूर्ण प्रतिबंध लागू नहीं होता; वास्तविक प्रतिबंध संबंधित भारतीय कानूनों और स्थल-विशिष्ट प्रबंधन-योजनाओं पर निर्भर करते हैं।
जैव मात्रा में ईंधन की लकड़ी, घास, चारा, पत्तियाँ, फल, बीज और अन्य जैविक वन-संसाधन सम्मिलित हो सकते हैं।
राष्ट्रीय उद्यान में संसाधन-संग्रह पर प्रतिबंध का उद्देश्य प्राकृतिक पर्यावास को अक्षुण्ण रखना और वन्यजीवों पर मानवीय दबाव कम करना है।