Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
संसार की अधिकांश प्रवाल भित्तियाँ उष्णकटिबंधीय जलों में हैं।
संसार की प्रवाल भित्तियों के एक-तिहाई से अधिक हिस्से ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस के राज्य-क्षेत्रों में स्थित हैं।
प्रवाल भित्तियाँ उष्णकटिबंधीय वर्षावनों की अपेक्षा कहीं अधिक संख्या में जंतु संघों को आश्रय देती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1 और 2
केवल 3
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Solution
कथन 1 सही है: संसार की अधिकांश विशाल और जैव-विविधतापूर्ण प्रवाल भित्तियाँ उष्णकटिबंधीय तथा उपोष्णकटिबंधीय समुद्री जल में पाई जाती हैं।
भित्ति-निर्माता प्रवालों को सामान्यतः उथला, स्वच्छ, सूर्यप्रकाशयुक्त, गर्म और सामान्य समुद्री लवणता वाला जल अनुकूल होता है।
अधिकांश भित्ति-निर्माता प्रवालों के ऊतकों में प्रकाश-संश्लेषी शैवाल पाए जाते हैं, जिन्हें सामान्यतः जूज़ैंथेली कहा जाता है।
जूज़ैंथेली प्रकाश-संश्लेषण द्वारा प्रवालों को ऊर्जा और पोषक पदार्थ उपलब्ध कराते हैं, जबकि प्रवाल उन्हें सुरक्षित आवास तथा कार्बन डाइऑक्साइड देते हैं।
सूर्यप्रकाश की आवश्यकता के कारण प्रमुख उष्णकटिबंधीय प्रवाल भित्तियाँ सामान्यतः समुद्र के अपेक्षाकृत उथले भागों में विकसित होती हैं।
गहरे और ठंडे जल में भी कुछ प्रवाल पाए जाते हैं, लेकिन वे उष्णकटिबंधीय प्रकाश-संश्लेषी प्रवाल भित्तियों से अलग होते हैं।
कथन 2 सही है: ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस के समुद्री क्षेत्रों में विश्व की प्रवाल भित्तियों का एक-तिहाई से अधिक भाग स्थित है।
ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर रीफ विश्व की सबसे बड़ी प्रवाल-भित्ति प्रणाली है।
इंडोनेशिया और फिलीपींस कोरल ट्रायंगल के प्रमुख भाग हैं, जो विश्व में प्रवाल और प्रवाल-भित्ति मछलियों की सर्वाधिक विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है।
कोरल ट्रायंगल में इंडोनेशिया, फिलीपींस, मलेशिया, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीप और तिमोर-लेस्ते के समुद्री क्षेत्र सम्मिलित हैं।
कथन 3 सही है: प्रवाल भित्तियाँ अत्यन्त अधिक जैव विविधता को आश्रय देती हैं और इनमें उष्णकटिबंधीय वर्षावनों की तुलना में अधिक जंतु संघों का प्रतिनिधित्व पाया जाता है।
जंतु संघ वर्गीकरण की एक उच्च श्रेणी है। समुद्री पर्यावरण में अनेक ऐसे जंतु संघ पाए जाते हैं जिनका स्थलीय पर्यावरण में प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।
प्रवाल भित्तियाँ समुद्र-तल के बहुत छोटे भाग पर विस्तृत होने के बावजूद समुद्री मछलियों, मोलस्क, क्रस्टेशियन, स्पंज, एकाइनोडर्म और असंख्य अन्य जीवों को भोजन, आश्रय तथा प्रजनन-स्थल देती हैं।
इसी असाधारण जैव विविधता के कारण प्रवाल भित्तियों को प्रायः समुद्र के वर्षावन कहा जाता है।
भारत में प्रमुख प्रवाल-भित्ति क्षेत्र कच्छ की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी, लक्षद्वीप तथा अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में पाए जाते हैं।
समुद्री तापमान में वृद्धि से प्रवाल अपने सहजीवी शैवाल को बाहर निकाल सकते हैं, जिससे प्रवाल विरंजन होता है।
प्रवाल भित्तियों के अन्य प्रमुख खतरों में महासागरीय अम्लीकरण, प्रदूषण, अवसादन, विनाशकारी मत्स्याखेट और तटीय विकास सम्मिलित हैं।