JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ENVIRONMENT · 2016

Previous Year Question

प्रदूषण की समस्याओं के समाधान के संदर्भ में, जैवोपचारण तकनीक के कौन-से लाभ हैं?

  1. यह प्रकृति में घटित होने वाली उसी जैवनिम्नीकरण प्रक्रिया को संवर्धित कर प्रदूषण की सफाई करने की तकनीक है।

  2. कैडमियम और लेड जैसी भारी धातुओं से युक्त किसी भी संदूषक का सूक्ष्मजीवों के प्रयोग से जैवोपचारण द्वारा सहज ही और पूरी तरह उपचार किया जा सकता है।

  3. जैवोपचारण के लिए विशेष रूप से अभिकल्पित सूक्ष्मजीवों को सृजित करने में आनुवंशिक इंजीनियरी का उपयोग किया जा सकता है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :

A.

केवल 1

B.

केवल 2 और 3

C.

केवल 1 और 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: C

Detailed Solution

  • जैवोपचारण में सूक्ष्मजीवों, पौधों अथवा उनके एंजाइमों की सहायता से पर्यावरण में उपस्थित प्रदूषकों का अपघटन, रूपांतरण, निष्कासन अथवा स्थिरीकरण किया जाता है।

  • इसका प्रयोग प्रदूषित मृदा, भूजल, सतही जल, अवसाद और औद्योगिक अपशिष्ट के उपचार में किया जा सकता है।

  • कथन 1 सही है: प्रकृति में बैक्टीरिया और कवक जैसे सूक्ष्मजीव कार्बनिक पदार्थों का प्राकृतिक रूप से जैवनिम्नीकरण करते हैं।

  • जैवोपचारण में ऑक्सीजन, पोषक तत्त्व, इलेक्ट्रॉन ग्राही अथवा अन्य अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध कराकर इसी प्राकृतिक प्रक्रिया की गति बढ़ाई जा सकती है।

  • स्वदेशी सूक्ष्मजीवों की गतिविधि बढ़ाने के लिए उनके पर्यावरण में पोषक तत्त्व अथवा ऑक्सीजन मिलाने को जैव-उत्तेजन कहा जाता है।

  • प्रदूषक का अपघटन करने वाले चयनित सूक्ष्मजीवों को प्रदूषित स्थान पर मिलाने को जैव-संवर्धन कहा जाता है।

  • पेट्रोलियम हाइड्रोकार्बन, तेल, कुछ विलायक, कीटनाशक और अन्य जैवनिम्नीकरणीय कार्बनिक प्रदूषकों का जैवोपचारण द्वारा उपचार किया जा सकता है।

  • उपयुक्त परिस्थितियों में सूक्ष्मजीव कुछ कार्बनिक प्रदूषकों को कार्बन डाइऑक्साइड, जल, लवण और जैव मात्रा जैसे अपेक्षाकृत कम विषैले उत्पादों में परिवर्तित कर सकते हैं।

  • कथन 2 गलत है: कैडमियम और लेड जैसी भारी धातुएँ मूल रासायनिक तत्त्व हैं, इसलिए सूक्ष्मजीव इनका जैवनिम्नीकरण करके इन्हें नष्ट नहीं कर सकते।

  • सूक्ष्मजीव भारी धातुओं की ऑक्सीकरण अवस्था बदल सकते हैं अथवा उनका अवशोषण, जैव-संचय, अवक्षेपण और स्थिरीकरण कर सकते हैं।

  • इन प्रक्रियाओं से धातुओं की गतिशीलता अथवा जैव-उपलब्धता कम हो सकती है, लेकिन प्रत्येक भारी धातु-संदूषक का सहज और पूर्ण उपचार सुनिश्चित नहीं होता।

  • भारी धातुओं के उपचार के लिए कभी-कभी उत्खनन, स्थिरीकरण, रासायनिक उपचार अथवा पादप-निष्कर्षण जैसी अतिरिक्त विधियों की आवश्यकता होती है।

  • कथन 3 सही है: आनुवंशिक इंजीनियरी द्वारा सूक्ष्मजीवों में ऐसे जीन अथवा उपापचयी मार्ग विकसित किए जा सकते हैं जो विशिष्ट प्रदूषकों के अपघटन या रूपांतरण में सहायता करें।

  • आनुवंशिक रूप से अभिकल्पित सूक्ष्मजीवों के पर्यावरणीय उपयोग में जैव-सुरक्षा, पारिस्थितिक प्रभाव, आनुवंशिक पदार्थ के स्थानांतरण और प्रभावी नियंत्रण का मूल्यांकन आवश्यक होता है।

  • जैवोपचारण परंपरागत भौतिक अथवा रासायनिक उपचारों की तुलना में कम खर्चीला और कम पर्यावरण-विघटनकारी हो सकता है।

  • इसकी प्रभावशीलता प्रदूषक की प्रकृति, तापमान, pH, नमी, ऑक्सीजन, पोषक तत्त्वों और सूक्ष्मजीवों के लिए प्रदूषक की उपलब्धता पर निर्भर करती है।

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