Previous Year Question
नदी-तलों में भारी बालू खनन के निम्नलिखित में से कौन-सा/से संभावित परिणाम है/हैं?
जल में लवणता का कम होना
भूजल का प्रदूषण
भूजल-स्तर का नीचे चले जाना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
केवल 1
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: B
Detailed Solution
नदी की बालू केवल निर्माण सामग्री नहीं है; यह नदी की संरचना, भूजल पुनर्भरण, जल की प्राकृतिक छनन-प्रक्रिया और जलीय पर्यावास को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अत्यधिक बालू खनन से नदी-तल का स्तर नीचे चला जाता है तथा नदी की प्राकृतिक आकृति और प्रवाह-व्यवस्था बदल सकती है।
कथन 1 गलत है: भारी बालू खनन का सामान्य परिणाम जल की लवणता में कमी होना नहीं है।
तटीय और ज्वारीय नदी क्षेत्रों में नदी-तल अधिक गहरा हो जाने से समुद्री लवणयुक्त जल नदी तथा समीपवर्ती भूजल में अधिक अंदर तक प्रवेश कर सकता है।
इसलिए कुछ क्षेत्रों में बालू खनन से लवणता कम होने के स्थान पर लवणीय जल का अंतःप्रवेश और लवणता में वृद्धि हो सकती है।
कथन 2 सही है: नदी-तल में उपस्थित बालू जल के लिए प्राकृतिक फिल्टर की तरह कार्य करती है।
बालू की परत हटने से जल की प्राकृतिक छनन-क्षमता कम हो सकती है तथा प्रदूषकों का नदी से समीपवर्ती जलभृतों में प्रवेश आसान हो सकता है।
तटीय क्षेत्रों में लवणीय जल का अंतःप्रवेश भी भूजल की गुणवत्ता को खराब कर सकता है और उसे पेयजल अथवा सिंचाई के लिए अनुपयुक्त बना सकता है।
खनन से उत्पन्न गाद, मशीनों से रिसने वाला तेल और अन्य स्थानीय प्रदूषक भी सतही जल तथा भूजल को प्रभावित कर सकते हैं।
कथन 3 सही है: नदी-तल का स्तर नीचे जाने पर नदी और समीपवर्ती भूजल के बीच जल-दाब प्रवणता बदल जाती है।
इसके कारण आसपास के जलभृतों का जल नदी की ओर प्रवाहित हो सकता है, जिससे भूजल-स्तर नीचे चला जाता है।
भूजल-स्तर नीचे जाने से नदी के आसपास स्थित कुओं, नलकूपों और आर्द्रभूमियों में उपलब्ध जल की मात्रा कम हो सकती है।
अत्यधिक बालू खनन से नदी-तटों का कटाव, पुलों की नींव का अस्थिर होना, नदी-तल में गहरे गड्ढे बनना और जलीय जीवों के आवासों का विनाश भी हो सकता है।
बालू हटने से मछलियों के प्रजनन-स्थल, तल में रहने वाले जीव और नदी-तटीय वनस्पति प्रभावित हो सकते हैं।
अतःभूजलकाप्रदूषणऔरभूजल-स्तरकानीचेजानाभारीबालूखननकेसंभावितपरिणामहैं।इसलिएकेवलकथन2 और 3 सहीहैं।