JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ENVIRONMENT · 2018

Previous Year Question

कृषि मृदाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. मृदा में कार्बनिक पदार्थ का अधिक अंश उसकी जल धारण क्षमता को प्रबल रूप से कम करता है।

  2. मृदा सल्फर चक्र में कोई भूमिका नहीं निभाती है।

  3. समय की एक अवधि तक सिंचाई से कुछ कृषि भूमियों के लवणीकरण में योगदान हो सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.

केवल 1 और 2

B.

केवल 3

C.

केवल 1 और 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: B

Detailed Solution

  • कथन 1 गलत है: मृदा में कार्बनिक पदार्थ की अधिक मात्रा उसकी जल धारण क्षमता को कम नहीं करती, बल्कि सामान्यतः बढ़ाती है।

  • कार्बनिक पदार्थ के विघटन से बनने वाला ह्यूमस अपने भार की तुलना में काफी अधिक जल धारण कर सकता है।

  • कार्बनिक पदार्थ मृदा-कणों को जोड़कर स्थिर मृदा समुच्चय बनाता है। इससे मृदा की संरचना, सरंध्रता और जल के अंतःस्रवण में सुधार होता है।

  • रेतीली मृदा में कार्बनिक पदार्थ जल और पोषक तत्त्वों को रोकने की क्षमता बढ़ाता है, जबकि चिकनी मृदा में यह वातन और संरचना सुधार सकता है।

  • इसलिए कार्बनिक पदार्थ का अधिक अंश जल धारण क्षमता को ‘प्रबल रूप से कम’ करता है, यह कथन गलत है।

  • कथन 2 गलत है: मृदा सल्फर चक्र का एक महत्त्वपूर्ण घटक है।

  • चट्टानों के अपक्षय, वायुमंडलीय निक्षेपण, उर्वरकों तथा पौधों और जीवों के अवशेषों से सल्फर मृदा में पहुँचता है।

  • मृदा के सूक्ष्मजीव कार्बनिक सल्फर का खनिजीकरण करके उसे सल्फेट के रूप में परिवर्तित करते हैं, जिसे पौधे जड़ों द्वारा अवशोषित कर सकते हैं।

  • पौधों और जीवों की मृत्यु के बाद सल्फर पुनः कार्बनिक अवशेषों के माध्यम से मृदा में लौट आता है।

  • सल्फेट का निक्षालन हो सकता है और ऑक्सीजन की कमी वाली दशाओं में सल्फेट का अपचयन होकर हाइड्रोजन सल्फाइड भी बन सकता है।

  • अतः मृदा सल्फर के भंडारण, रूपांतरण, पौधों द्वारा ग्रहण और निक्षालन में सक्रिय भूमिका निभाती है।

  • कथन 3 सही है: सिंचाई के जल में सामान्यतः कुछ मात्रा में घुले हुए लवण उपस्थित होते हैं।

  • सिंचाई के बाद जल वाष्पित हो जाता है अथवा पौधों द्वारा उपयोग कर लिया जाता है, लेकिन उसमें उपस्थित लवण मृदा में रह सकते हैं।

  • लंबे समय तक सिंचाई, अपर्याप्त जल-निकास और अधिक वाष्पीकरण के कारण ये लवण जड़-क्षेत्र तथा मृदा की ऊपरी परतों में संचित हो सकते हैं।

  • उथला भूजल स्तर होने पर लवणयुक्त जल केशिकीय क्रिया द्वारा ऊपर आ सकता है। जल के वाष्पित होने के बाद लवण मृदा की सतह के पास जमा हो जाते हैं।

  • यह समस्या विशेष रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में गंभीर होती है, जहाँ वर्षा लवणों को मृदा से बाहर निकालने के लिए पर्याप्त नहीं होती।

  • सिंचाई के कारण उत्पन्न इस प्रक्रिया को द्वितीयक लवणीकरण कहा जाता है। इससे पौधों के लिए जल ग्रहण करना कठिन हो जाता है और फसल उत्पादकता घट सकती है।

  • उपयुक्त जल-निकास, नियंत्रित सिंचाई, अच्छी गुणवत्ता वाले जल और आवश्यकतानुसार लवणों के निक्षालन द्वारा इस समस्या को कम किया जा सकता है।

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