JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

ENVIRONMENT · 2019

Previous Year Question

निम्नलिखित में से किसके संदर्भ में कुछ वैज्ञानिक सिरस मेघ विरलन तकनीक और समतापमंडल में सल्फेट एयरोसॉल के अंतःक्षेपण के उपयोग का सुझाव देते हैं?

A.

कुछ क्षेत्रों में कृत्रिम वर्षा करवाने के लिए

B.

उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की बारंबारता और तीव्रता कम करने के लिए

C.

पृथ्वी पर सौर पवनों के प्रतिकूल प्रभाव कम करने के लिए

D.

भूमंडलीय तापन कम करने के लिए

Correct Answer: D

Detailed Solution

  • सिरस मेघ विरलन और समतापमंडलीय सल्फेट एयरोसॉल अंतःक्षेपण को भूमंडलीय तापन सीमित करने के लिए प्रस्तावित जलवायु हस्तक्षेप अथवा भू-अभियांत्रिकी तकनीकों के रूप में देखा जाता है।

  • दोनों तकनीकों का उद्देश्य पृथ्वी के विकिरण-संतुलन में परिवर्तन करके तापमान कम करना है, लेकिन दोनों की कार्यविधि अलग है।

  • सिरस मेघ अत्यधिक ऊँचाई पर बनने वाले पतले बादल हैं, जो मुख्यतः बर्फ के क्रिस्टलों से बने होते हैं।

  • सिरस मेघ पृथ्वी से निकलने वाले दीर्घतरंग अवरक्त विकिरण के एक भाग को रोककर पुनः पृथ्वी की ओर भेज सकते हैं। इस कारण उनका शुद्ध प्रभाव प्रायः तापनकारी होता है।

  • सिरस मेघ विरलन में उपयुक्त हिम-नाभिकीय कणों की सहायता से बर्फ के क्रिस्टलों के निर्माण और आकार को परिवर्तित करने का प्रस्ताव है।

  • इसका उद्देश्य सिरस मेघों का जीवनकाल अथवा प्रकाशीय मोटाई कम करना है, जिससे पृथ्वी का अधिक दीर्घतरंग विकिरण अंतरिक्ष में निकल सके।

  • यह कृत्रिम वर्षा कराने वाली सामान्य मेघ-बीजन प्रक्रिया से अलग है।

  • समतापमंडलीय सल्फेट एयरोसॉल अंतःक्षेपण में सल्फर डाइऑक्साइड अथवा अन्य सल्फरयुक्त पदार्थों को समतापमंडल में पहुँचाने का प्रस्ताव है।

  • ये पदार्थ समतापमंडल में सल्फेट एयरोसॉल बनाते हैं, जो आने वाले सौर विकिरण के एक भाग को परावर्तित करके अंतरिक्ष में वापस भेज सकते हैं।

  • इससे पृथ्वी द्वारा अवशोषित सौर ऊर्जा कम होगी और वैश्विक औसत तापमान में अस्थायी कमी आ सकती है।

  • यह प्रभाव बड़े ज्वालामुखीय विस्फोटों के बाद बनने वाले सल्फेट एयरोसॉल से होने वाले अल्पकालिक वैश्विक शीतलन के समान माना जाता है।

  • ये तकनीकें वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को नहीं हटातीं और समुद्री अम्लीकरण जैसी CO₂ से संबंधित समस्याओं का समाधान नहीं करतीं।

  • इनके संभावित जोखिमों में वर्षा और मानसून प्रतिरूपों में परिवर्तन, समतापमंडलीय ओज़ोन पर प्रभाव, क्षेत्रीय जलवायु-असमानता तथा तकनीक अचानक रोकने पर तीव्र तापन शामिल हैं।

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवातों पर इनका कोई प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन चक्रवातों की बारंबारता अथवा तीव्रता कम करना इनका प्राथमिक प्रस्तावित उद्देश्य नहीं है।

  • इन तकनीकों का सौर पवनों के प्रभाव को नियंत्रित करने से कोई संबंध नहीं है।

  • अतः दोनों तकनीकों का प्रस्तावित उद्देश्य भूमंडलीय तापन को कम करना है।

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