Previous Year Question
पर्यावरण में निर्मुक्त हो जाने वाली ‘सूक्ष्ममणिकाओं (माइक्रोबीड्स)’ के विषय में अत्यधिक चिंता क्यों है?
ये समुद्री पारितंत्रों के लिए हानिकारक मानी जाती हैं।
ये बच्चों में त्वचा कैंसर का कारण मानी जाती हैं।
ये इतनी छोटी होती हैं कि सिंचित खेतों में फसली पौधों द्वारा अवशोषित हो जाती हैं।
प्रायः इनका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों में मिलावट के लिए किया जाता है।
Correct Answer: A
Detailed Solution
माइक्रोबीड्स अत्यन्त छोटे, ठोस और जानबूझकर निर्मित प्लास्टिक कण होते हैं। सामान्यतः इनका आकार 5 मिलीमीटर से कम होता है।
माइक्रोबीड्स को प्राथमिक माइक्रोप्लास्टिक माना जाता है, क्योंकि इन्हें प्रारम्भ से ही सूक्ष्म आकार में बनाया जाता है।
इसके विपरीत, बड़ी प्लास्टिक वस्तुओं के टूटने और विखंडित होने से बनने वाले छोटे कणों को द्वितीयक माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है।
माइक्रोबीड्स का प्रयोग कुछ प्रसाधन-सामग्रियों, फेसवॉश, स्क्रब, टूथपेस्ट और औद्योगिक सफाई उत्पादों में किया जाता रहा है।
ये प्रायः पॉलीएथिलीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीस्टाइरीन तथा अन्य कृत्रिम बहुलकों से बनाए जाते हैं।
अपने अत्यन्त छोटे आकार के कारण ये अपशिष्ट-जल उपचार संयंत्रों की छनन-व्यवस्था से निकलकर नदियों, झीलों और समुद्रों तक पहुँच सकते हैं।
ये जल में आसानी से विघटित अथवा जैव-अपघटित नहीं होते, इसलिए समुद्री पर्यावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं।
प्लवक, मछलियाँ, शंख-सीप, कछुए और समुद्री पक्षी इन्हें भोजन समझकर निगल सकते हैं।
इनके अंतर्ग्रहण से पाचन-तंत्र में अवरोध, आंतरिक क्षति, भोजन ग्रहण करने की क्षमता में कमी तथा वृद्धि और प्रजनन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
माइक्रोबीड्स की सतह पर कुछ विषैले रसायन और स्थायी कार्बनिक प्रदूषक चिपक सकते हैं। प्लास्टिक में उपस्थित रासायनिक योजक भी पर्यावरण में मुक्त हो सकते हैं।
इन कणों तथा उनसे जुड़े प्रदूषकों का जलीय जीवों के माध्यम से खाद्य-शृंखला में स्थानांतरण संभव है।
विकल्प (b) गलत है: बच्चों में त्वचा कैंसर उत्पन्न करना माइक्रोबीड्स से जुड़ी प्रमुख स्थापित पर्यावरणीय चिंता नहीं है।
विकल्प (c) गलत है: फसली पौधों द्वारा इनका अवशोषण इस प्रश्न में व्यक्त व्यापक चिंता का प्रमुख आधार नहीं है।
विकल्प (d) गलत है: माइक्रोबीड्स को सामान्यतः खाद्य पदार्थों में मिलावट के लिए प्रयोग नहीं किया जाता।
अतः माइक्रोबीड्स के विषय में प्रमुख चिंता यह है कि वे समुद्री पारितंत्रों के लिए हानिकारक हैं।