Previous Year Question
कृषि में फर्टिगेशन के क्या लाभ हैं?
सिंचाई के जल की क्षारीयता का नियंत्रण संभव है।
रॉक फॉस्फेट और सभी अन्य फॉस्फेटिक उर्वरकों का दक्षतापूर्वक अनुप्रयोग संभव है।
पौधों के लिए पोषकों की बढ़ी हुई उपलब्धता संभव है।
रासायनिक पोषकों के निक्षालन में कमी संभव है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
केवल 1, 2 और 3
केवल 1, 2 और 4
केवल 1, 3 और 4
केवल 2, 3 और 4
Correct Answer: C
Detailed Solution
फर्टिगेशन में सिंचाई के जल के साथ घुलनशील उर्वरकों को पौधों के जड़-क्षेत्र तक पहुँचाया जाता है। इसका प्रयोग सामान्यतः ड्रिप सिंचाई प्रणाली के साथ किया जाता है।
कथन 1 सही है: फर्टिगेशन प्रणाली में उपयुक्त अम्लीय उर्वरक अथवा नियंत्रित मात्रा में अम्ल मिलाकर सिंचाई के जल की क्षारीयता और बाइकार्बोनेट स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है।
जल की अधिक क्षारीयता के कारण कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे तत्त्व अवक्षेपित होकर ड्रिप उत्सर्जकों को बंद कर सकते हैं। क्षारीयता का नियंत्रण इस समस्या को कम करता है।
कथन 2 गलत है: फर्टिगेशन के लिए उर्वरक का जल में पूर्णतः घुलनशील होना आवश्यक है।
रॉक फॉस्फेट जल में बहुत कम घुलनशील होता है। इसके कण ड्रिप पाइपों और उत्सर्जकों को अवरुद्ध कर सकते हैं, इसलिए इसका दक्षतापूर्वक प्रयोग फर्टिगेशन द्वारा नहीं किया जा सकता।
सभी फॉस्फेटिक उर्वरक भी फर्टिगेशन के लिए उपयुक्त नहीं होते। केवल जल में घुलनशील और अन्य उर्वरकों के साथ रासायनिक रूप से संगत फॉस्फेटिक उर्वरकों का उपयोग किया जा सकता है।
कथन 3 सही है: फर्टिगेशन द्वारा पोषक तत्त्वों को कम मात्रा में, बार-बार और फसल की वृद्धि-अवस्था के अनुसार जड़ों के सक्रिय क्षेत्र में पहुँचाया जाता है।
इससे पौधों के लिए पोषक तत्त्वों की उपलब्धता बढ़ती है तथा उर्वरक-उपयोग दक्षता में सुधार होता है।
कथन 4 सही है: पोषक तत्त्वों की नियंत्रित और विभाजित मात्रा जड़-क्षेत्र में दिए जाने के कारण उनके जड़-क्षेत्र से नीचे जाने की संभावना कम हो जाती है।
इससे नाइट्रेट जैसे गतिशील पोषक तत्त्वों का निक्षालन कम हो सकता है। इसके लिए सिंचाई और उर्वरक की मात्रा का सही निर्धारण आवश्यक है।
फर्टिगेशन से जल और उर्वरक की बचत, पोषक तत्त्वों का समान वितरण तथा श्रम की आवश्यकता में कमी हो सकती है।
इसकी सफलता के लिए जल की गुणवत्ता, उर्वरकों की घुलनशीलता और अनुकूलता, उचित छनन, प्रणाली की नियमित फ्लशिंग तथा सही सिंचाई-अनुसूची आवश्यक हैं।