Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
भारत में, जैवविविधता प्रबंधन समितियाँ नागोया प्रोटोकॉल के उद्देश्यों को हासिल करने की कुंजी हैं।
जैवविविधता प्रबंधन समितियों के, अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत जैविक संसाधनों तक पहुँच के लिए संग्रह शुल्क लगाने की शक्ति सहित, पहुँच और लाभ सहभागिता निर्धारित करने में महत्त्वपूर्ण प्रकार्य हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: C
Detailed Solution
कथन 1 सही है।
नागोया प्रोटोकॉल जैव विविधता अभिसमय के अंतर्गत आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच और उनके उपयोग से उत्पन्न लाभों के उचित तथा न्यायसंगत बँटवारे से संबंधित समझौता है।
इसे वर्ष 2010 में जापान के नागोया में अपनाया गया और वर्ष 2014 में यह प्रभावी हुआ।
इसका प्रमुख उद्देश्य genetic resources तक उचित पहुँच और उनके उपयोग से प्राप्त लाभों का प्रदाता देश तथा संबंधित समुदायों के साथ न्यायसंगत बँटवारा सुनिश्चित करना है।
भारत में जैवविविधता प्रबंधन समितियाँ स्थानीय स्तर पर जैविक संसाधनों और उनसे संबंधित पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण तथा अभिलेखीकरण में भूमिका निभाती हैं।
जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 41 के अंतर्गत प्रत्येक स्थानीय निकाय को अपने क्षेत्र में जैवविविधता प्रबंधन समिति गठित करनी होती है।
BMCs स्थानीय जैविक संसाधनों, उनके उपयोग और संबंधित पारंपरिक ज्ञान का विवरण People’s Biodiversity Register में दर्ज करने में सहायता करती हैं।
स्थानीय संसाधनों तथा पारंपरिक ज्ञान के वास्तविक धारकों की पहचान के बिना Access and Benefit Sharing को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सकता है।
इसलिए स्थानीय स्तर पर कार्य करने वाली BMCs नागोया प्रोटोकॉल के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
कथन 2 सही है।
जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अनुसार राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण और राज्य जैवविविधता बोर्ड को किसी BMC के क्षेत्र में पाए जाने वाले जैविक संसाधनों तथा संबंधित ज्ञान के उपयोग पर निर्णय लेते समय उस समिति से परामर्श करना होता है।
BMCs स्थानीय जैविक संसाधनों, उनके पारंपरिक उपयोग और उन्हें संरक्षित करने वाले समुदायों से संबंधित स्थानीय जानकारी उपलब्ध कराती हैं।
अधिनियम की धारा 41 BMC को अपने क्षेत्राधिकार में व्यावसायिक उद्देश्य से जैविक संसाधन प्राप्त या एकत्र करने वाले व्यक्ति से collection fee लगाने की शक्ति प्रदान करती है।
यह शुल्क प्रत्येक प्रकार के सामान्य या गैर-व्यावसायिक उपयोग पर स्वतः लागू नहीं होता; इसका संबंध व्यावसायिक उद्देश्य से संसाधनों के access अथवा collection से है।
BMCs लाभ प्राप्त करने के पात्र स्थानीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान धारकों की पहचान करने में भी सहायता करती हैं।
इनके माध्यम से लाभों का monetary या non-monetary रूप में बँटवारा किया जा सकता है।
Non-monetary benefits में तकनीकी हस्तांतरण, स्थानीय क्षमता निर्माण, अनुसंधान में भागीदारी और समुदाय के लिए संस्थागत सहायता सम्मिलित हो सकती है।
इस प्रकार BMCs स्थानीय स्तर पर Access and Benefit Sharing व्यवस्था के क्रियान्वयन की महत्त्वपूर्ण संस्था हैं।
भारत की संस्थागत व्यवस्था
राष्ट्रीय स्तर पर National Biodiversity Authority कार्य करता है।
राज्य स्तर पर State Biodiversity Boards कार्य करते हैं।
स्थानीय स्तर पर Biodiversity Management Committees कार्य करती हैं।
यह त्रिस्तरीय व्यवस्था जैविक संसाधनों के संरक्षण, सतत उपयोग और लाभों के न्यायसंगत बँटवारे में सहायता करती है।