Previous Year Question
भारत के निम्नलिखित नगरों पर विचार कीजिए :
भद्राचलम
चंदेरी
कांचीपुरम
करनाल
उपर्युक्त में से कौन-कौन से पारम्परिक साड़ी/वस्त्र उत्पादन के लिए सुख्यात हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1, 2 और 3
1, 3 और 4
Correct Answer: B
Detailed Solution
2. चंदेरी: सही
चंदेरी मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित ऐतिहासिक हथकरघा केंद्र है।
चंदेरी वस्त्र अपनी पारदर्शी बनावट, हल्के वजन और सूक्ष्म चमक के लिए प्रसिद्ध है।
चंदेरी में मुख्यतः तीन प्रकार के वस्त्र बुने जाते हैं:
शुद्ध रेशम।
रेशम-कपास मिश्रित वस्त्र।
चंदेरी सूती वस्त्र।
इसके पारंपरिक अलंकरणों में अशर्फी अथवा सिक्का, कैरी, कमल, फूल और मोर जैसे बूटे सम्मिलित हैं। इन बूटों तथा किनारों में प्रायः सोने अथवा चाँदी के रंग की जरी का प्रयोग होता है।
चंदेरी वस्त्र पहले केवल साड़ियों तक सीमित नहीं था; इससे साफा, पगड़ी और धोती जैसे वस्त्र भी बनाए जाते थे।
चंदेरी साड़ियाँ भौगोलिक संकेतक के रूप में पंजीकृत उत्पाद हैं।
3. कांचीपुरम: सही
कांचीपुरम तमिलनाडु का प्रमुख शुद्ध रेशमी हथकरघा केंद्र है और इसका नाम कांचीपुरम रेशमी साड़ियों का पर्याय बन गया है।
ये साड़ियाँ मुख्यतः शुद्ध शहतूत रेशम से बुनी जाती हैं तथा इनके किनारों और पल्लू में जरी का प्रयोग किया जाता है।
इनके पारंपरिक रूपांकनों पर दक्षिण भारतीय मंदिर स्थापत्य, पौराणिक आकृतियों, पशु-पक्षियों और प्राकृतिक प्रतीकों का प्रभाव दिखाई देता है।
डिजाइन की जटिलता के अनुसार एक कांचीपुरम साड़ी को तैयार करने में लगभग 20 से 40 दिन लग सकते हैं।
कांचीपुरम सिल्क भी भौगोलिक संकेतक के रूप में पंजीकृत है।
1 और 4 क्यों नहीं?
भद्राचलम वर्तमान तेलंगाना में गोदावरी नदी के किनारे स्थित प्रमुख धार्मिक नगर है। इसकी राष्ट्रीय पहचान पारंपरिक साड़ी अथवा विशिष्ट वस्त्र उत्पादन केंद्र के रूप में नहीं है।
करनाल हरियाणा का महत्त्वपूर्ण कृषि एवं कृषि-अनुसंधान केंद्र है; यह पारंपरिक साड़ी अथवा विशिष्ट हथकरघा वस्त्र के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध नहीं है।