Previous Year Question
भारत की निम्नलिखित फसलों पर विचार कीजिए :
लोबिया
मूँग
अरहर
उपर्युक्त में से कौन-सा/से दाल, चारा और हरी खाद के रूप में प्रयोग होता है/होते हैं?
1 और 2
केवल 2
1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Solution
लोबिया, मूँग और अरहर तीनों फैबेसी अथवा लेग्यूम कुल की फसलें हैं। इनकी जड़ों की ग्रंथियों में पाए जाने वाले राइजोबियम जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन का जैविक स्थिरीकरण करते हैं। इसलिए ये खाद्य उत्पादन के साथ-साथ पशु-पोषण और मृदा की उर्वरता में सुधार के लिए भी उपयोगी हैं।
लोबिया: लोबिया के सूखे बीज दाल के रूप में और कोमल फलियाँ सब्जी के रूप में प्रयोग की जाती हैं। इसके हरे पौधे तथा कटाई के बाद बचा हुआ भाग पौष्टिक पशु-चारा प्रदान करता है। इसकी तीव्र वृद्धि और पर्याप्त हरे जैवभार के कारण इसे हरी खाद अथवा आवरण फसल के रूप में भी उगाया जाता है। मिट्टी में मिलाने पर इसका जैवभार कार्बनिक पदार्थ एवं नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है।
मूँग: मूँग के बीज दाल के रूप में उपयोग किए जाते हैं। इसके पौधे और फसल-अवशेष पशुओं को चारे के रूप में दिए जा सकते हैं। मूँग अल्पावधि वाली फसल है, इसलिए इसे मुख्य फसलों के बीच अथवा फसल-चक्र में उगाकर पुष्पन से पहले मिट्टी में मिलाया जा सकता है। इस प्रकार यह हरी खाद के रूप में मृदा में कार्बनिक पदार्थ और जैविक रूप से स्थिर नाइट्रोजन जोड़ती है।
अरहर: अरहर के परिपक्व बीज प्रमुख दाल के रूप में प्रयोग होते हैं। इसकी पत्तियाँ, कोमल शाखाएँ और फसल-अवशेष पशु-चारे के रूप में काम आते हैं। इसके हरे जैवभार को मिट्टी में मिलाकर हरी खाद के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। इसकी गहरी जड़ें मृदा की निचली परतों से पोषक तत्त्व प्राप्त करती हैं; पत्ती-पतन, जड़-अवशेष और जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण के माध्यम से यह मृदा की उर्वरता सुधारती है।
अतः लोबिया, मूँग और अरहर—तीनों का प्रयोग दाल, चारा और हरी खाद के रूप में किया जाता है।