JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

GEOGRAPHY · 2018

Previous Year Question

भारतीय कृषि की परिस्थितियों के संदर्भ में, ‘संरक्षण कृषि’ (कंजर्वेशन एग्रीकल्चर) की संकल्पना का महत्त्व बढ़ जाता है। निम्नलिखित में से कौन-कौन से संरक्षण कृषि के अंतर्गत आते हैं?

  1. एकल कृषि पद्धतियों का परिहार

  2. न्यूनतम जोत को अपनाना

  3. बागानी फसलों की खेती का परिहार

  4. मृदा तल को ढकने के लिए फसल अवशिष्ट का उपयोग

  5. स्थानिक एवं कालिक फसल अनुक्रमण/फसल आवर्तनों को अपनाना

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :

A.

केवल 1, 3 और 4

B.

केवल 2, 3, 4 और 5

C.

केवल 2, 4 और 5

D.

केवल 1, 2, 3 और 5

Correct Answer: C

Detailed Solution

संरक्षण कृषि की तीन मुख्य क्रियात्मक आधारशिलाएँ हैं:

  • मृदा में न्यूनतम यांत्रिक विक्षोभ;

  • मृदा की सतह पर स्थायी जैविक आवरण;

  • फसलों का विविधीकरण तथा उपयुक्त फसल-चक्र।

कथन 1 सही विकल्प में सम्मिलित नहीं है।

  • एकल कृषि का सामान्य परिहार जैव-विविधता और मृदा-स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।

  • लेकिन प्रश्न में इसे संरक्षण कृषि की स्वतंत्र क्रियात्मक पद्धति के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

  • संरक्षण कृषि का अधिक सटीक सिद्धांत फसलों का विविधीकरण और स्थानिक अथवा कालिक फसल-चक्र है, जिसे कथन 5 अलग से व्यक्त करता है।

  • इसलिए प्रश्न की संरचना और निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार कथन 1 को नहीं चुना जाएगा।

कथन 2 सही है—न्यूनतम जोत।

  • संरक्षण कृषि में जुताई को न्यूनतम रखा जाता है अथवा शून्य-जुताई अपनाई जाती है।

  • इससे मृदा-संरचना और मृदा के सूक्ष्मजीवों का आवास कम विक्षुब्ध होता है।

  • बार-बार जुताई से होने वाला मृदा-कटाव, नमी की हानि, जीवाश्म ईंधन का उपयोग और कृषि-लागत कम होती है।

  • न्यूनतम जोत का अर्थ यह नहीं है कि खेत में कभी कोई यांत्रिक कार्य नहीं होगा; इसका अर्थ अनावश्यक मृदा-विक्षोभ को घटाना है।

कथन 3 गलत है।

  • संरक्षण कृषि बागानी फसलों की खेती का निषेध नहीं करती।

  • इसके सिद्धांतों को बागानों, फलोद्यानों तथा अन्य स्थायी फसल-प्रणालियों में भी अपनाया जा सकता है।

  • उदाहरण के लिए भूमि पर जैविक आवरण, मल्च, आवरण फसल और न्यूनतम मृदा-विक्षोभ बागानी कृषि में उपयोगी हो सकते हैं।

कथन 4 सही है—फसल अवशिष्ट से मृदा आवरण।

  • कटाई के बाद फसल अवशेषों को जलाने या पूरी तरह हटाने के स्थान पर खेत की सतह पर रखा जाता है।

  • अवशेष वर्षा-बूँदों के प्रत्यक्ष प्रहार और सतही जल-प्रवाह को कम करके मृदा-कटाव घटाते हैं।

  • यह आवरण वाष्पीकरण कम करता है, मृदा में नमी बनाए रखता है, तापमान के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करता है और मृदा कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने में सहायता करता है।

कथन 5 सही है—स्थानिक एवं कालिक फसल विविधीकरण।

  • कालिक अनुक्रमण का अर्थ अलग-अलग ऋतुओं या वर्षों में फसल-चक्र अपनाना है।

  • स्थानिक अनुक्रमण में अंतरफसली खेती, मिश्रित फसल अथवा फसल-सहचर्य सम्मिलित हो सकते हैं।

  • दलहनी फसलों को चक्र में सम्मिलित करने से जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण, पोषक तत्त्वों के संतुलित उपयोग और कीट-रोग चक्र तोड़ने में सहायता मिल सकती है।

  • विविध जड़-प्रणालियाँ मृदा की अलग-अलग परतों से जल और पोषक तत्त्व ग्रहण करती हैं।

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