Previous Year Question
भारत के खनिज संसाधनों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए :
खनिज | 90% प्राकृतिक स्रोत कहाँ हैं | |
1. | ताँबा | झारखण्ड |
2. | निकेल | उड़ीसा |
3. | टंगस्टन | केरल |
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: B
Detailed Solution
इस प्रश्न में केवल यह नहीं पूछा गया है कि कोई खनिज संबंधित राज्य में पाया जाता है अथवा नहीं। दावा यह है कि उस खनिज के लगभग 90% प्राकृतिक संसाधन उस राज्य में स्थित हैं। यही प्रश्न का मुख्य तथ्य और trap है।
युग्म 1: ताँबा—झारखण्ड — गलत
झारखण्ड के सिंहभूम क्षेत्र में ताँबा अवश्य पाया जाता है, लेकिन भारत के 90% ताँबा संसाधन झारखण्ड में नहीं हैं।
IBM के 1 अप्रैल 2015 के संसाधन-आकलन के अनुसार:
राजस्थान—53.81%
झारखण्ड—19.54%
मध्य प्रदेश—18.75%
अन्य राज्य—लगभग 7.9%
अर्थात झारखण्ड ताँबा संसाधनों वाला महत्त्वपूर्ण राज्य है, परन्तु उसका हिस्सा 90% नहीं है। यहाँ खनिज की उपस्थिति और देश के 90% संसाधनों की उपस्थिति के बीच अंतर करना आवश्यक है।
युग्म 2: निकेल—उड़ीसा — सही
IBM के 1 अप्रैल 2010 के आकलन के अनुसार भारत में निकेल अयस्क के कुल संसाधन लगभग 189 मिलियन टन थे। इनमें:
उड़ीसा—175 मिलियन टन, अर्थात लगभग 92%
झारखण्ड—लगभग 9 मिलियन टन
नागालैंड—लगभग 5 मिलियन टन
कर्नाटक—नाममात्र संसाधन
उड़ीसा में प्रमुख निकेल occurrence जाजपुर जिले की सुकिंदा घाटी में है। यहाँ निकेलयुक्त limonite, chromite निक्षेपों के ऊपर स्थित overburden में oxide रूप में पाया जाता है।
इसलिए 90% वाले मानदंड के संदर्भ में युग्म 2 सही है।
युग्म 3: टंगस्टन—केरल — गलत
IBM की 1 अप्रैल 2010 की National Mineral Inventory में केरल को टंगस्टन संसाधन वाले राज्यों में सूचीबद्ध नहीं किया गया है।
उस समय भारत में टंगस्टन के कुल संसाधनों में लगभग 1,42,094 टन contained WO₃ आकलित था। इसमें:
राजस्थान—लगभग 93,708 टन contained WO₃, अर्थात लगभग 66%
आंध्र प्रदेश—लगभग 20,263 टन
महाराष्ट्र—लगभग 16,035 टन
कर्नाटक—लगभग 6,235 टन
शेष संसाधन हरियाणा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखण्ड और तमिलनाडु में थे।
राजस्थान का डेगाना क्षेत्र भारत का प्रमुख ऐतिहासिक टंगस्टन क्षेत्र है। यहाँ wolframite vein, stockwork तथा जलोढ़ निक्षेपों के रूप में मिलता है।
एक उपयोगी तथ्य यह है कि कर्नाटक में टंगस्टन-bearing ore की कुल मात्रा राजस्थान से अधिक दर्ज थी, लेकिन उसमें contained WO₃ बहुत कम था। इससे स्पष्ट होता है कि केवल ore tonnage नहीं, बल्कि उसमें उपस्थित वास्तविक उपयोगी खनिज की मात्रा और grade भी महत्त्वपूर्ण है।