Previous Year Question
भारत में गौण खनिज के प्रबंधन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
इस देश में विद्यमान विधि के अनुसार रेत एक ‘गौण खनिज’ है।
गौण खनिजों के खनन पट्टे प्रदान करने की शक्ति राज्य सरकारों के पास है, किन्तु गौण खनिजों को प्रदान करने से संबंधित नियमों को बनाने के बारे में शक्तियाँ केन्द्र सरकार के पास हैं।
गौण खनिजों के अवैध खनन को रोकने के लिए नियम बनाने की शक्ति राज्य सरकारों के पास है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1 और 3
2 और 3
केवल 3
1, 2 और 3
Correct Answer: A
Detailed Solution
इस प्रश्न का आधार खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957—MMDR Act की धाराएँ 3(e), 14, 15 और 23C हैं।
कथन 1 सही है
MMDR Act की धारा 3(e) के अनुसार गौण खनिजों में निम्नलिखित शामिल हैं:
भवन-निर्माण में प्रयुक्त पत्थर,
बजरी,
साधारण मिट्टी,
और साधारण रेत।
लेकिन यहाँ एक महत्त्वपूर्ण कानूनी अपवाद है—निर्धारित औद्योगिक उद्देश्यों में प्रयुक्त रेत को छोड़कर साधारण रेत गौण खनिज है। इसका अर्थ है कि कानून प्रत्येक प्रकार की रेत को स्वतः गौण खनिज नहीं मानता; कथन में प्रयुक्त सामान्य अर्थ वाली रेत इस श्रेणी में आती है।
अतः कथन 1 सही है।
कथन 2 गलत है
इसका पहला भाग सही है—राज्य सरकारें गौण खनिजों के संबंध में खनन पट्टे, उत्खनन पट्टे तथा अन्य खनिज रियायतें प्रदान कर सकती हैं।
लेकिन दूसरा भाग गलत है। MMDR Act की:
धारा 14 के अनुसार अधिनियम की धाराएँ 5 से 13 गौण खनिजों पर लागू नहीं होतीं।
धारा 15(1) राज्य सरकार को राजपत्र में अधिसूचना जारी करके गौण खनिजों के खनन पट्टों, उत्खनन पट्टों तथा अन्य खनिज रियायतों को विनियमित करने के लिए नियम बनाने की शक्ति देती है।
अर्थात् गौण खनिजों के पट्टे प्रदान करने और उनसे संबंधित नियम बनाने—दोनों की शक्ति राज्य सरकार के पास है। केन्द्र सरकार सामान्य ढाँचा निर्धारित करती है, लेकिन कथन में नियम बनाने की शक्ति केवल केन्द्र सरकार को देना गलत है।
इसलिए कथन का पहला भाग सही होने पर भी पूरा कथन 2 गलत हो जाता है।
कथन 3 सही है
MMDR Act की धारा 23C राज्य सरकार को अवैध खनन, खनिजों के अवैध परिवहन और अवैध भंडारण को रोकने के लिए नियम बनाने की शक्ति देती है।
धारा 23C के अंतर्गत राज्य सरकार निम्नलिखित व्यवस्थाओं से संबंधित नियम बना सकती है:
खनिज परिवहन की जाँच के लिए चेक-पोस्ट स्थापित करना,
परिवहन किए जा रहे खनिज की मात्रा मापने के लिए धर्मकाँटे लगाना,
खनिजों के परिवहन को विनियमित करना,
उत्खनन, भंडारण अथवा परिवहन के दौरान निरीक्षण और तलाशी करना,
आवश्यक रजिस्टर और प्रपत्र निर्धारित करना।
अतः राज्य सरकारों की शक्ति केवल पट्टा प्रदान करने तक सीमित नहीं है; वे अवैध खनन, परिवहन और भंडारण रोकने के लिए प्रवर्तन-नियम भी बना सकती हैं।