Previous Year Question
भारत की लैटेराइट मृदाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं?
ये आम तौर पर लाल रंग की होती हैं।
ये नाइट्रोजन और पोटॉश से समृद्ध होती हैं।
इनका राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अच्छा विकास हुआ है।
इन मृदाओं में टैपिओका और काजू की अच्छी उपज होती है।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
केवल 1, 2 और 3
केवल 2, 3 और 4
केवल 1 और 4
केवल 2 और 3
Correct Answer: C
Detailed Solution
ये आम तौर पर लाल रंग की होती हैं—सही
लैटेराइट मृदा का निर्माण उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में होने वाली तीव्र निक्षालन प्रक्रिया से होता है। वर्षाजल सिलिका, चूना और अन्य घुलनशील पदार्थों को मृदा की ऊपरी परत से नीचे ले जाता है। लौह और एल्युमिनियम के ऑक्साइड अपेक्षाकृत कम घुलनशील होने के कारण पीछे रह जाते हैं। लौह ऑक्साइड के कारण मृदा को लाल अथवा लाल-भूरा रंग मिलता है।
ये नाइट्रोजन और पोटॉश से समृद्ध होती हैं—गलत
भारी वर्षा के कारण होने वाले निक्षालन से नाइट्रोजन, पोटॉश, फॉस्फोरस, चूना और मैग्नीशिया जैसे पोषक तत्त्व मृदा से बाहर निकल जाते हैं। इसलिए लैटेराइट मृदा सामान्यतः—
नाइट्रोजन, पोटॉश और फॉस्फोरस में निर्धन;
ह्यूमस की कम मात्रा वाली;
अम्लीय प्रकृति की;
लौह और एल्युमिनियम ऑक्साइड से समृद्ध होती है।
खाद और उर्वरकों के उचित प्रयोग से इसे कृषि के लिए उत्पादक बनाया जा सकता है।
इनका राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अच्छा विकास हुआ है—गलत
लैटेराइट मृदा के विकास के लिए उच्च तापमान, भारी वर्षा और तीव्र निक्षालन आवश्यक है। राजस्थान की शुष्क-अर्द्धशुष्क परिस्थितियाँ इसके व्यापक निर्माण के अनुकूल नहीं हैं। उत्तर प्रदेश भी भारत का प्रमुख लैटेराइट मृदा क्षेत्र नहीं है।
भारत में लैटेराइट मृदा मुख्यतः कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा के पहाड़ी क्षेत्रों तथा असम के कुछ भागों में पाई जाती है। इसका विस्तार पश्चिमी और पूर्वी घाट के अनेक क्षेत्रों में भी है।
इन मृदाओं में टैपिओका और काजू की अच्छी उपज होती है—सही
लैटेराइट मृदा प्राकृतिक रूप से कम उपजाऊ होने के बावजूद उचित खाद, सिंचाई और पोषक प्रबंधन के साथ टैपिओका तथा काजू जैसी फसलों के लिए उपयुक्त होती है। केरल और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों की लैटेराइट मृदाओं में टैपिओका, काजू, नारियल, सुपारी, काली मिर्च तथा अनानास जैसी फसलें उगाई जाती हैं।
अतिरिक्त तथ्य
Laterite शब्द लैटिन भाषा के Later शब्द से बना है, जिसका अर्थ ईंट होता है।
यह मृदा वायु के संपर्क में आने और सूखने पर कठोर हो सकती है तथा कई क्षेत्रों में भवन-निर्माण के लिए ईंट जैसे खंडों के रूप में प्रयोग की जाती है।
मृदा की उर्वरता मूल चट्टान, निक्षालन की तीव्रता और वनस्पति आवरण के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
अधिक ऊँचाई वाले लैटेराइट क्षेत्रों में उचित उर्वरक प्रबंधन के साथ चाय और कॉफी जैसी फसलें भी उगाई जाती हैं।
अतः कथन 1 और 4 सही हैं।