Previous Year Question
भारत में मृदा अपक्षय समस्या निम्नलिखित में से किससे/किनसे संबंधित है/हैं?
वेदिका कृषि
वनोन्मूलन
उष्णकटिबंधीय जलवायु
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-
केवल 1 और 2
केवल 2
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: B
Detailed Solution
वेदिका कृषि—गलत
वेदिका कृषि में पहाड़ी ढाल को सीढ़ीनुमा समतल खेतों में परिवर्तित किया जाता है। इससे ढाल की लंबाई कम होती है, सतही जल-प्रवाह की गति घटती है, जल का अंतःस्रवण बढ़ता है और बहती हुई मिट्टी वेदिकाओं पर जमा हो जाती है। इसलिए यह मृदा अपरदन का कारण नहीं, बल्कि मृदा-संरक्षण की विधि है।
वनोन्मूलन—सही
वनस्पति का वितान वर्षा की बूँदों के प्रत्यक्ष आघात को रोकता है, पत्तियों का कूड़ा जल को सोखता है और वृक्षों की जड़ें मृदा-कणों को बाँधकर रखती हैं। वनोन्मूलन के बाद—
वर्षा की बूँदें सीधे भूमि पर गिरती हैं;
अंतःस्रवण घटता और सतही प्रवाह बढ़ता है;
जड़ों द्वारा मृदा को बाँधने की क्षमता समाप्त होती है;
परत, नाली और अवनालिका अपरदन तीव्र हो सकता है।
इसलिए भारत में मृदा अपक्षय की समस्या वनोन्मूलन से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है।
उष्णकटिबंधीय जलवायु—गलत
तीव्र वर्षा अपरदन की क्षमता बढ़ा सकती है, लेकिन केवल उष्णकटिबंधीय जलवायु अपने-आप मृदा अपक्षय का पर्याप्त कारण नहीं है। अपरदन वर्षा की तीव्रता के साथ-साथ ढाल, मृदा की प्रकृति, वनस्पति आवरण और भूमि-उपयोग पर निर्भर करता है। अक्षुण्ण उष्णकटिबंधीय वन का घना वितान, पत्ती-कूड़ा और जड़-तंत्र मृदा की रक्षा करते हैं। अतः प्रश्न के संदर्भ में उष्णकटिबंधीय जलवायु को स्वतंत्र कारण नहीं माना गया है।
अतिरिक्त तथ्य
परत अपरदन: भूमि की ऊपरी पतली परत का समान रूप से बह जाना।
नाली अपरदन: बहता हुआ जल भूमि पर छोटी-छोटी नालियाँ बना देता है।
अवनालिका अपरदन: नालियों के गहरा और चौड़ा होकर बड़ी अवनालिकाओं में बदलने से भूमि कृषि के लिए अनुपयुक्त हो सकती है।
ऊपरी उपजाऊ मृदा हटने से ह्यूमस, पोषक तत्त्व और मृदा की जलधारण क्षमता घटती है तथा नदियों एवं जलाशयों में गाद जमती है।
वनीकरण, समोच्च जुताई, वेदिका कृषि, पट्टीदार खेती और नियंत्रित चराई प्रमुख संरक्षण उपाय हैं।
अतः केवल कथन 2 सही है।