JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

GEOGRAPHY · 2021

Previous Year Question

भारत में काली कपास मृदा की रचना, निम्नलिखित में से किसके अपक्षयण से हुई है?

A.

भूरी वन मृदा

B.

विदरी (फिशर) ज्वालामुखीय चट्टान

C.

ग्रेनाइट और शिस्ट

D.

शेल और चूना-पत्थर

Correct Answer: B

Detailed Solution

सही उत्तर: (b) विदरी (फिशर) ज्वालामुखीय चट्टान

भारत की काली कपास मृदा का निर्माण मुख्यतः दक्कन ट्रैप की बेसाल्टिक ज्वालामुखीय चट्टानों के अपक्षय से हुआ है।

  • प्रायद्वीपीय भारत में ज्वालामुखीय उद्गार किसी एक केंद्रीय मुख से न होकर भू-पर्पटी की लंबी दरारों अथवा विदरों (fissures) से हुए थे।

  • इन दरारों से अत्यधिक तरल बेसाल्टिक लावा निकला और विस्तृत क्षेत्र में परत-दर-परत फैल गया। इन जमी हुई लावा-परतों से दक्कन ट्रैप का निर्माण हुआ।

  • इन्हीं बेसाल्टिक चट्टानों के दीर्घकालीन भौतिक एवं रासायनिक अपक्षय से अत्यन्त महीन और मृण्मय काली मृदा बनी। इसे रेगुर मृदा भी कहा जाता है।

  • इसका प्रमुख विस्तार महाराष्ट्र, सौराष्ट्र, मालवा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के पठारी भागों में है। यह गोदावरी और कृष्णा नदी-घाटियों की ओर भी विस्तृत है।

काली मृदा की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ

  • इसमें चिकनी मिट्टी अर्थात् क्ले का अनुपात अधिक होता है।

  • इसकी नमी धारण करने की क्षमता बहुत अधिक होती है।

  • गीली होने पर यह फूलती और चिपचिपी हो जाती है, जबकि सूखने पर सिकुड़कर इसमें चौड़ी एवं गहरी दरारें पड़ती हैं।

  • इन दरारों से मिट्टी में वायु-संचार होता है और निचली मिट्टी ऊपर आ जाती है; इसलिए इसे स्वतः जुताई वाली मृदा भी कहा जाता है।

  • यह कैल्सियम कार्बोनेट, मैग्नीशियम, पोटाश और चूने से अपेक्षाकृत समृद्ध, परन्तु फॉस्फोरस से सामान्यतः गरीब होती है।

  • अधिक नमी-धारण क्षमता के कारण यह कपास की खेती के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है; इसलिए इसका नाम काली कपास मृदा पड़ा।

अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?

  • भूरी वन मृदा स्वयं एक मृदा-प्रकार है, मूल ज्वालामुखीय चट्टान नहीं।

  • ग्रेनाइट और शिस्ट के अपक्षय से प्रायद्वीपीय भारत में सामान्यतः लाल एवं पीली मृदाओं का विकास होता है।

  • शेल और चूना-पत्थर स्थानीय मृदाओं के मूल पदार्थ हो सकते हैं, लेकिन विस्तृत दक्कन क्षेत्र की काली कपास मृदा का प्रमुख मूल पदार्थ नहीं हैं।

Continue practicing free PYQs with your JAGTIV account.