Previous Year Question
निम्नलिखित पर विचार कीजिए :
काजू
पपीता
रक्त चंदन
उपर्युक्त में से कितने वृक्ष वास्तव में भारत के देशीय वृक्ष हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
कोई नहीं
Correct Answer: A
Detailed Solution
यहाँ देशीय वृक्ष का अर्थ ऐसी प्रजाति से है जिसकी प्राकृतिक मूल-वितरण सीमा भारत में है। भारत में किसी विदेशी प्रजाति की व्यापक खेती होने मात्र से वह भारत की देशीय प्रजाति नहीं हो जाती।
1. काजू—भारत का देशीय वृक्ष नहीं
काजू का वैज्ञानिक नाम Anacardium occidentale है।
इसका प्राकृतिक मूल क्षेत्र उष्णकटिबंधीय अमेरिका है। क्यू के ‘Plants of the World Online’ के अनुसार इसकी देशीय वितरण-सीमा त्रिनिदाद से दक्षिणी उष्णकटिबंधीय अमेरिका तक है।
भारत में काजू की व्यापक खेती विशेष रूप से केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में होती है, लेकिन व्यापक कृषि-विस्तार इसे भारत का देशीय वृक्ष नहीं बनाता।
अतः काजू भारत के लिए एक प्रविष्ट एवं कृषि-कृत प्रजाति है।
2. पपीता—भारत का देशीय वृक्ष नहीं
पपीते का वैज्ञानिक नाम Carica papaya है।
इसका प्राकृतिक मूल क्षेत्र दक्षिणी मैक्सिको से वेनेजुएला तक का उष्णकटिबंधीय अमेरिकी क्षेत्र है।
आज भारत पपीते का प्रमुख उत्पादक है और यह देश के अनेक भागों में उगाया जाता है, परंतु इसका मूल प्राकृतिक वितरण भारत में नहीं है।
अतः पपीता भी भारत का देशीय वृक्ष नहीं है।
3. रक्त चंदन—भारत का देशीय वृक्ष
रक्त चंदन का वैज्ञानिक नाम Pterocarpus santalinus है।
इसकी प्राकृतिक मूल-वितरण सीमा दक्षिणी भारत है। यह विशेष रूप से आंध्र प्रदेश के दक्षिणी पूर्वी घाटों के सीमित क्षेत्रों में पाया जाता है।
इसकी प्रमुख प्राकृतिक उपस्थिति शेषाचलम, वेलिकोंडा, पालकोंडा और लंकामलाई जैसी पर्वत-शृंखलाओं से संबंधित है।
यह शुष्क पर्णपाती वनों, पथरीली एवं कम उपजाऊ मिट्टी और लगभग 150–900 मीटर ऊँचाई वाले क्षेत्रों में अच्छी तरह विकसित होता है।
इसकी लाल रंग की कठोर अंतःकाष्ठ अत्यधिक मूल्यवान होती है। इसी कारण अवैध कटाई और तस्करी इसके संरक्षण के लिए गंभीर खतरे हैं।
रक्त चंदन को सामान्य चंदन या श्वेत चंदन—Santalum album—से नहीं मिलाना चाहिए। दोनों अलग वानस्पतिक प्रजातियाँ हैं।
इस प्रकार केवल रक्त चंदन भारत का देशीय वृक्ष है।
अतः सही उत्तर (a) केवल एक है।