Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
पूरे वर्ष 30° उ० और 60° द० अक्षांशों के बीच बहने वाली पवनों को पछुआ पवनें कहा जाता है।
भारत के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में शीतकालीन वर्षा करने वाली आर्द्र वायु संहतियाँ पछुआ पवनों का भाग होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1, न ही 2
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1—गलत
पछुआ पवनें दोनों गोलार्द्धों के मध्य अक्षांशों में बहती हैं:
उत्तरी गोलार्द्ध में लगभग 30° उत्तरी अक्षांश से 60° उत्तरी अक्षांश के बीच।
दक्षिणी गोलार्द्ध में लगभग 30° दक्षिणी अक्षांश से 60° दक्षिणी अक्षांश के बीच।
ये उपोष्ण उच्चदाब पेटियों से उपध्रुवीय निम्नदाब पेटियों की ओर बहती हैं।
पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में ये पवनें दाहिनी ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बाईं ओर विक्षेपित होती हैं।
सामान्य रूप से इनका प्रवाह पश्चिम से पूर्व की ओर होता है, इसलिए इन्हें पछुआ पवनें कहा जाता है।
कथन में इन्हें 30° उत्तरी और 60° दक्षिणी अक्षांशों के बीच बहने वाली पवनें बताया गया है। यह क्षेत्र दोनों गोलार्द्धों के व्यापारिक पवन क्षेत्र और भूमध्यरेखीय क्षेत्र को भी समाहित कर लेता है। इसलिए यह पछुआ पवनों की सही अक्षांशीय स्थिति नहीं है।
कथन 2—सही
उत्तर-पश्चिम भारत में शीतकालीन वर्षा मुख्यतः पश्चिमी विक्षोभों से होती है।
पश्चिमी विक्षोभ मध्य अक्षांशीय पश्चिमी पवन-प्रणाली के साथ पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ने वाले बहिरुष्णकटिबंधीय मौसम तंत्र हैं।
ये सामान्यतः भूमध्यसागरीय तथा पश्चिम एशियाई क्षेत्र से आर्द्रता प्राप्त करते हुए ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते भारत पहुँचते हैं।
इनसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखण्ड में हिमपात तथा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शीतकालीन वर्षा होती है।
यह वर्षा गेहूँ जैसी रबी फसलों के लिए लाभदायक होती है, लेकिन अत्यधिक वर्षा, ओलावृष्टि या तेज पवनें फसलों को नुकसान भी पहुँचा सकती हैं।