Previous Year Question
लूनी नदी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक सही है?
यह बहकर खम्भात की खाड़ी में जा मिलती है।
यह बहकर कच्छ की खाड़ी में जा मिलती है।
यह पाकिस्तान में से बहते हुए सिन्धु की एक सहायक नदी में विलीन हो जाती है।
यह कच्छ के रन की दलदली भूमि में लुप्त हो जाती है।
Correct Answer: D
Detailed Solution
लूनी पश्चिमी राजस्थान की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी प्रणालियों में से एक है। यह समुद्र तक पहुँचने वाली सामान्य नदी नहीं, बल्कि शुष्क प्रदेश की अंतःस्थलीय अपवाह नदी है। यह दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहते हुए अंततः कच्छ के रन की दलदली एवं लवणीय भूमि में लुप्त हो जाती है।
लूनी नदी का प्रवाह:
इसका उद्गम राजस्थान में अजमेर के निकट अरावली पर्वतमाला की पश्चिमी ढाल और पुष्कर घाटी से होता है।
अपने ऊपरी प्रवाह में इसे सागरमती कहा जाता है।
यह मुख्यतः राजस्थान के पाली, जोधपुर, बालोतरा-बाड़मेर और जालौर क्षेत्रों से होकर दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती है।
यह किसी स्थायी समुद्री मुहाने या डेल्टा का निर्माण नहीं करती।
कम वर्षा, अत्यधिक वाष्पीकरण, रेतीली भूमि में जल के रिसाव और अनियमित प्रवाह के कारण इसका अधिकांश जल अंतिम भाग तक पहुँचने से पहले कम हो जाता है।
अंततः इसकी धाराएँ कच्छ के रन की दलदली एवं लवणीय भूमि में समाप्त हो जाती हैं।
लूनी के जल की लवणता:
उद्गम क्षेत्र के निकट इसका जल अपेक्षाकृत मीठा होता है।
बालोतरा के बाद नदी का जल अधिक खारा होने लगता है।
इसका कारण शुष्क प्रदेश की लवणयुक्त मिट्टी, कम जल-प्रवाह तथा अत्यधिक वाष्पीकरण है।
‘लूनी’ नाम को भी संस्कृत के लवण अर्थात नमक से संबंधित माना जाता है।
प्रमुख सहायक नदियाँ: जवाई, सुकड़ी, बाँडी, जोजरी, गुहिया और सागी इसकी प्रमुख सहायक नदियों में सम्मिलित हैं। इनमें अधिकांश मौसमी नदियाँ हैं और मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
विकल्प (a): लूनी खम्भात की खाड़ी में नहीं गिरती। माही, नर्मदा, तापी और साबरमती जैसी नदियाँ खम्भात की खाड़ी से संबंधित हैं।
विकल्प (b): इसका कोई नियमित प्रवाह कच्छ की खाड़ी तक नहीं पहुँचता; यह उससे पहले कच्छ के रन की दलदली भूमि में समाप्त हो जाती है।
विकल्प (c): लूनी पाकिस्तान जाकर सिंधु की किसी सहायक नदी में नहीं मिलती।
विकल्प (d): यही लूनी के अंतःस्थलीय अपवाह का सही वर्णन करता है।