Previous Year Question
दो महत्त्वपूर्ण नदियाँ—जिनमें से एक का स्रोत झारखंड में है (और जो ओडिशा में दूसरे नाम से जानी जाती है) तथा दूसरी, जिसका स्रोत ओडिशा में है—समुद्र में बहने से पहले बंगाल की खाड़ी के तट से थोड़ी ही दूरी पर एक स्थान पर मिलती हैं। यह वन्यजीवन और जैवविविधता का एक महत्त्वपूर्ण स्थल तथा संरक्षित क्षेत्र है।
निम्नलिखित में से वह कौन-सा हो सकता है?
भीतरकनिका
चांदीपुर-ऑन-सी
गोपालपुर-ऑन-सी
सिमलिपाल
Correct Answer: B
Detailed Solution
प्रश्न में वर्णित नदियाँ ब्राह्मणी और बैतरणी हैं तथा संबंधित संरक्षित क्षेत्र भीतरकनिका है।
ब्राह्मणी नदी:
ब्राह्मणी का निर्माण ओडिशा में राउरकेला के निकट वेदव्यास में शंख और दक्षिण कोयल नदियों के संगम से होता है।
शंख और दक्षिण कोयल नदी-तंत्र के स्रोत छोटानागपुर पठार तथा झारखंड से जुड़े हैं।
इन धाराओं के ओडिशा में मिलने के बाद नदी ब्राह्मणी के नाम से जानी जाती है।
बैतरणी नदी:
बैतरणी का उद्गम ओडिशा के क्योंझर जिले में स्थित गोनासिका पहाड़ियों से होता है।
यह पूर्णतः ओडिशा से उद्गमित होने वाली महत्त्वपूर्ण नदी है।
ब्राह्मणी और बैतरणी नदियाँ ओडिशा के तटीय क्षेत्र में एक संयुक्त डेल्टाई एवं ज्वारनदमुखी तंत्र बनाती हैं। ये नदियाँ धामरा मुहाने के निकट बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करती हैं। इसी नदी-तंत्र में भीतरकनिका स्थित है।
भीतरकनिका की प्रमुख विशेषताएँ:
यह ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में स्थित है।
इसका प्राकृतिक क्षेत्र ब्राह्मणी–बैतरणी–धामरा नदी-तंत्र द्वारा निर्मित है।
यहाँ ज्वारीय खाड़ियाँ, दलदली भूमि, कीचड़ मैदान और घने मैंग्रोव वन पाए जाते हैं।
भीतरकनिका वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना 1975 में हुई थी।
इसके केंद्रीय भाग को 1998 में भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
भीतरकनिका मैंग्रोव को 2002 में रामसर आर्द्रभूमि का दर्जा मिला।
यह खारे पानी के मगरमच्छ के महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक आवासों में से एक है।
यहाँ अनेक स्थानीय और प्रवासी जलपक्षी, भारतीय अजगर, किंग कोबरा तथा चीतल पाए जाते हैं।
मैंग्रोव तट को चक्रवातों और तूफानी लहरों से बचाते हैं तथा मछलियों एवं झींगों के लिए प्रजनन और पोषण क्षेत्र प्रदान करते हैं।
इसके निकट स्थित गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य ओलिव रिडले कछुओं के सामूहिक अंडे देने या अरिबाडा के लिए प्रसिद्ध है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
चांदीपुर-ऑन-सी: यह बालेश्वर तट पर समुद्र के ज्वार के समय कई किलोमीटर पीछे हटने की घटना के लिए प्रसिद्ध है।
गोपालपुर-ऑन-सी: यह गंजाम जिले में स्थित बंदरगाह एवं समुद्रतटीय पर्यटन स्थल है।
सिमलिपाल: यह मयूरभंज जिले का अंतर्देशीय राष्ट्रीय उद्यान, बाघ अभयारण्य और जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र है; यह समुद्रतटीय नदी-संगम क्षेत्र नहीं है।