Previous Year Question
निम्नलिखित नदियों पर विचार कीजिए :
वंशधारा
इंद्रावती
प्राणहिता
पेन्नार
उपर्युक्त में से कौन-सी गोदावरी की सहायक नदियाँ हैं?
1, 2 और 3
2, 3 और 4
1, 2 और 4
2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Solution
इंद्रावती और प्राणहिता गोदावरी की सहायक नदियाँ हैं। वंशधारा और पेन्नार स्वतंत्र पूर्ववाहिनी नदियाँ हैं, जो सीधे बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।
गोदावरी नदी-तंत्र
गोदावरी का उद्गम महाराष्ट्र के नासिक जिले में त्र्यंबकेश्वर के निकट ब्रह्मगिरि पहाड़ियों से होता है।
लगभग 1,465 किलोमीटर लंबी गोदावरी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है।
विशाल नदी-बेसिन के कारण इसे दक्षिण गंगा कहा जाता है।
यह महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से होकर बहती है तथा इसका बेसिन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और कर्नाटक के भागों तक फैला है।
यह आंध्र प्रदेश में विस्तृत डेल्टा बनाकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
इसकी प्रमुख सहायक नदियों में पूर्णा, मंजीरा, पेनगंगा, वर्धा, वैनगंगा, प्राणहिता, इंद्रावती और सबरी शामिल हैं।
1. वंशधारा: गोदावरी की सहायक नहीं
वंशधारा का उद्गम ओडिशा के कालाहांडी क्षेत्र में पूर्वी घाट की पहाड़ियों से होता है।
यह ओडिशा और आंध्र प्रदेश से होकर दक्षिण-पूर्व दिशा में बहती है।
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में प्रवेश करने के बाद यह कलिंगपट्टनम के निकट बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
यह किसी बड़ी नदी की सहायक नदी नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र पूर्ववाहिनी नदी है।
महेंद्रतनया इसकी महत्त्वपूर्ण सहायक नदी है।
वंशधारा बेसिन सिंचाई और धान की कृषि के लिए महत्त्वपूर्ण है।
अतः वंशधारा गोदावरी की सहायक नदी नहीं है।
2. इंद्रावती: गोदावरी की सहायक
इंद्रावती नदी का उद्गम ओडिशा के कालाहांडी क्षेत्र में पूर्वी घाट से होता है।
यह पश्चिम दिशा में बहते हुए छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में प्रवेश करती है।
बस्तर में इंद्रावती नदी पर प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात स्थित है।
चित्रकोट जलप्रपात को उसकी चौड़ी घोड़े की नाल जैसी आकृति के कारण कभी-कभी ‘भारत का नियाग्रा’ कहा जाता है।
इंद्रावती आगे छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्र से होकर बहती हुई गोदावरी में मिलती है।
यह गोदावरी की प्रमुख बाएँ तट की सहायक नदियों में शामिल है।
इंद्रावती नदी-तंत्र बस्तर की कृषि, वन पारिस्थितिकी और आदिवासी आजीविका के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व भी इसी नदी क्षेत्र से संबंधित हैं।
अतः इंद्रावती गोदावरी की सहायक नदी है।
3. प्राणहिता: गोदावरी की सहायक
प्राणहिता नदी का निर्माण वर्धा और वैनगंगा नदियों के संगम से होता है।
पेनगंगा नदी भी वर्धा नदी-तंत्र के माध्यम से प्राणहिता में अपना जल पहुँचाती है।
प्राणहिता महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच लंबी सीमा बनाती है।
यह तेलंगाना के कालेश्वरम के निकट गोदावरी नदी में मिलती है।
जलग्रहण क्षेत्र और जल-प्रवाह की दृष्टि से प्राणहिता गोदावरी की सबसे महत्त्वपूर्ण सहायक नदियों में शामिल है।
इसका विशाल जलग्रहण क्षेत्र महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के भागों तक फैला है।
प्राणहिता के माध्यम से वर्धा-वैनगंगा तंत्र का जल गोदावरी में पहुँचता है।
अतः प्राणहिता गोदावरी की सहायक नदी है।
4. पेन्नार: गोदावरी की सहायक नहीं
पेन्नार को पेन्ना अथवा उत्तर पिनाकिनी भी कहा जाता है।
इसका उद्गम कर्नाटक की नंदी पहाड़ियों के निकट होता है।
यह कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से होकर पूर्व दिशा में बहती है।
इसकी प्रमुख सहायक नदियों में जयमंगली, चित्रावती, पापाग्नी, कुंडेरू और चेय्येरू शामिल हैं।
यह आंध्र प्रदेश में नेल्लोर के निकट बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
इसका स्वतंत्र नदी-बेसिन कृष्णा बेसिन के दक्षिण और कावेरी बेसिन के उत्तर में स्थित है।
गंडिकोटा घाटी का निर्माण भी पेन्नार नदी ने किया है।
अतः पेन्नार गोदावरी की सहायक नदी नहीं है।