Previous Year Question
निम्नलिखित में से कौन-सी ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी/नदियाँ है/हैं?
दिबांग
कामेंग
लोहित
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
केवल 1
2 और 3
1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: D
Detailed Solution
दिबांग, कामेंग और लोहित—तीनों ब्रह्मपुत्र नदी-तंत्र की सहायक नदियाँ हैं। दिबांग और लोहित ऊपरी ब्रह्मपुत्र के निर्माण में योगदान करती हैं, जबकि कामेंग असम में ब्रह्मपुत्र से मिलती है।
ब्रह्मपुत्र का नाम और प्रवाह
ब्रह्मपुत्र का उद्गम तिब्बत में कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र के निकट स्थित हिमनदों से होता है।
तिब्बत में इसे यारलुंग सांगपो अथवा त्सांगपो कहा जाता है।
यह तिब्बती पठार पर हिमालय के समानांतर पूर्व दिशा में बहती है।
नामचा बरवा के निकट यह एक गहरा महाखड्ड बनाकर दक्षिण की ओर मुड़ती है।
अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करने पर इसे सियांग अथवा दिहांग कहा जाता है।
दिबांग और लोहित नदियों से मिलने के बाद असम के मैदान में इसे ब्रह्मपुत्र कहा जाता है।
बांग्लादेश में यह जमुना कहलाती है और आगे पद्मा तथा मेघना नदी-तंत्र से मिलती है।
1. दिबांग नदी
दिबांग नदी का उद्गम अरुणाचल प्रदेश के ऊँचे हिमालयी क्षेत्र में तिब्बत सीमा के निकट होता है।
यह ऊपरी और निचली दिबांग घाटी जिलों से होकर दक्षिण दिशा में बहती है।
पर्वतीय भाग में नदी तीव्र ढाल, गहरी घाटियों और तेज प्रवाह से युक्त है।
मैदान में प्रवेश करने पर यह कई धाराओं में विभाजित होकर विस्तृत नदी-पट्टी बनाती है।
दिबांग आगे सियांग और लोहित के साथ मिलकर ब्रह्मपुत्र के मुख्य प्रवाह के निर्माण में योगदान करती है।
दिबांग घाटी मिश्मी जनजातीय क्षेत्रों और समृद्ध पूर्वी हिमालयी जैवविविधता के लिए जानी जाती है।
इसलिए दिबांग ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी है।
2. कामेंग नदी
कामेंग नदी का उद्गम अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र में गोरीचेन पर्वत समूह के निकट हिमालयी क्षेत्र से होता है।
यह पश्चिम कामेंग और पूर्वी कामेंग क्षेत्रों से होकर बहती है।
अरुणाचल प्रदेश में इसे कामेंग कहा जाता है।
असम के मैदान में प्रवेश करने के बाद इसे जिया भराली कहा जाता है।
यह तेजपुर के निकट ब्रह्मपुत्र में मिलती है।
कामेंग ब्रह्मपुत्र की प्रमुख उत्तर-तटीय सहायक नदियों में शामिल है।
इसका जलग्रहण क्षेत्र ऊँचे हिमालय, वनाच्छादित पहाड़ियों और असम के जलोढ़ मैदानों तक फैला है।
इसलिए कामेंग भी ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी है।
3. लोहित नदी
लोहित नदी का उद्गम पूर्वी तिब्बत के पर्वतीय क्षेत्र में होता है।
यह अरुणाचल प्रदेश में किबिथू के निकट प्रवेश करती है।
इसके बाद यह मिश्मी पहाड़ियों से होकर तीव्र गति से पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती है।
लोहित घाटी में नदी गहरी घाटियों, तीव्र प्रवाह और भारी अवसाद-भार के लिए जानी जाती है।
प्रसिद्ध परशुराम कुंड लोहित नदी पर स्थित है।
सादिया क्षेत्र के निकट लोहित, दिबांग और सियांग नदी-तंत्र से मिलती है।
इस संगम के बाद मुख्य नदी असम में ब्रह्मपुत्र कहलाती है।
इसलिए लोहित ब्रह्मपुत्र की प्रमुख सहायक नदी है।
प्रवाह संबंध
यारलुंग सांगपो → सियांग/दिहांग
सियांग + दिबांग + लोहित → ब्रह्मपुत्र
कामेंग/जिया भराली → असम में ब्रह्मपुत्र
ब्रह्मपुत्र की अन्य प्रमुख सहायक नदियाँ
उत्तर से आने वाली नदियाँ
सुबनसिरी
कामेंग अथवा जिया भराली
मानस
संकोश
दक्षिण से आने वाली नदियाँ
बूढ़ी दिहिंग
दिसांग
दिखौ
धनसिरी
कोपिली
उत्तर की सहायक नदियाँ सामान्यतः हिमालय से अधिक जल और मोटा अवसाद लाती हैं। दक्षिण की सहायक नदियाँ नागा, मेघालय और कार्बी पहाड़ी क्षेत्रों से निकलती हैं।