Previous Year Question
‘राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA)’ की निम्नलिखित में से कौन-सी प्रमुख विशेषताएँ हैं?
1 और 2
2 और 3
1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: A
Detailed Solution
कथन 1 और 2 सही हैं, जबकि कथन 3 गलत है। NGRBA की अध्यक्षता किसी मुख्यमंत्री द्वारा चक्रानुक्रम से नहीं, बल्कि भारत के प्रधानमंत्री द्वारा की जाती थी।
NGRBA की स्थापना
केंद्र सरकार ने 20 फरवरी 2009 की अधिसूचना द्वारा राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की स्थापना की।
इसका गठन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत किया गया था।
इसे गंगा नदी के लिए एक सशक्त योजना, वित्तपोषण, निगरानी और समन्वय प्राधिकरण बनाया गया।
इसका उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों के गंगा प्रदूषण-नियंत्रण तथा संरक्षण प्रयासों को एकीकृत करना था।
गंगा को वर्ष 2008 में भारत की राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया था।
कथन 1: सही
नदी बेसिन को योजना और प्रबंधन की इकाई माना गया था।
NGRBA से पहले गंगा संरक्षण के प्रयास प्रायः अलग-अलग नगरों और प्रदूषण-स्रोतों पर केंद्रित थे।
NGRBA ने पूरी गंगा नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र को एक समग्र भौगोलिक एवं पारिस्थितिक इकाई के रूप में स्वीकार किया।
नदी बेसिन दृष्टिकोण में मुख्य नदी के साथ उसकी सहायक नदियाँ, भूजल, बाढ़ क्षेत्र, आर्द्रभूमियाँ और मानव गतिविधियाँ शामिल होती हैं।
इसका उद्देश्य केवल प्रदूषित जल के उपचार तक सीमित न रहकर पूरे नदी-तंत्र का समन्वित प्रबंधन करना था।
कथन 2: सही
NGRBA राष्ट्रीय स्तर पर नदी संरक्षण प्रयासों की अगुवाई करता था।
इसके प्रमुख कार्यों में शामिल थे:
गंगा बेसिन प्रबंधन योजना तैयार करना।
प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और उपशमन के कार्यक्रमों का समन्वय।
सीवेज उपचार अवसंरचना के लिए योजना और वित्त उपलब्ध कराना।
नदी में न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने के उपाय करना।
औद्योगिक और नगरीय प्रदूषण की निगरानी करना।
बाढ़ के मैदानों, जलीय जीवों और नदी पारिस्थितिकी का संरक्षण।
जल संरक्षण, पुनर्चक्रण, पुनः उपयोग और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना।
केंद्र, राज्यों, स्थानीय निकायों और अन्य संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना।
कार्यान्वयन मुख्यतः राज्य सरकारों और शहरी स्थानीय निकायों द्वारा किया जाना था।
कथन 3: गलत
NGRBA का अध्यक्ष चक्रानुक्रम से किसी राज्य का मुख्यमंत्री नहीं बनता था।
NGRBA की अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री करते थे।
गंगा के मुख्य प्रवाह वाले राज्यों—उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल—के मुख्यमंत्री इसके सदस्य थे।
संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के मंत्री भी इसके सदस्य होते थे।
प्राधिकरण प्रमुख सहायक नदियों वाले अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विशेषज्ञों को सहयोजित कर सकता था।
मुख्यमंत्री सदस्य थे, लेकिन अध्यक्ष नहीं।
NMCG से संबंध
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) को 2011 में NGRBA की कार्यान्वयन शाखा के रूप में स्थापित किया गया।
NMCG कार्यक्रमों और परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा राज्यों के साथ समन्वय के लिए उत्तरदायी था।
वर्तमान संस्थागत स्थिति
यह प्रश्न वर्ष 2016 की तत्कालीन NGRBA व्यवस्था पर आधारित है।
वर्ष 2016 में NGRBA के स्थान पर राष्ट्रीय गंगा परिषद स्थापित की गई।
इसका पूरा नाम राष्ट्रीय गंगा नदी पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन परिषद है।
राष्ट्रीय गंगा परिषद की अध्यक्षता भी प्रधानमंत्री करते हैं।
NMCG को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के अंतर्गत अधिक प्रशासनिक, वित्तीय और नियामक शक्तियाँ प्रदान की गईं।