JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

GEOGRAPHY · 2012

Previous Year Question

जब आप हिमालय में यात्रा करेंगे, तो आपको निम्नलिखित दिखाई देगा:

  1. गहरी घाटियाँ

  2. यू-घुमाव वाले नदी मार्ग

  3. समानान्तर पर्वत श्रेणियाँ

  4. भू-स्खलन के लिए उत्तरदायी तीव्र ढाल

उपर्युक्त में से कौन-से हिमालय के तरुण वलित पर्वत होने के साक्ष्य कहे जा सकते हैं?

A.

1 और 2

B.

1, 2 और 4

C.

3 और 4

D.

उपर्युक्त सभी

Correct Answer: D

Detailed Solution

हिमालय भूगर्भीय दृष्टि से नवीन अथवा तरुण वलित पर्वत हैं। इनका निर्माण भारतीय प्लेट और यूरेशियाई प्लेट की टक्कर से हुआ। प्लेटों का अभिसरण अभी भी जारी है, इसलिए हिमालयी क्षेत्र में उत्थान, भूकंप, भ्रंश, अपरदन और भू-स्खलन जैसी प्रक्रियाएँ सक्रिय हैं।

1. गहरी घाटियाँ—सही

सिंधु, सतलुज, ब्रह्मपुत्र और उनकी सहायक नदियों ने हिमालय में अत्यधिक गहरी घाटियों तथा गॉर्ज का निर्माण किया है।

  • इनमें से अनेक नदियाँ हिमालय के उत्थान से पहले से प्रवाहित हो रही थीं।

  • पर्वतों के ऊपर उठने के साथ नदियों ने अपने मार्ग में तीव्र अधोमुखी कटाव जारी रखा।

  • ऐसी नदियों को पूर्ववर्ती अथवा Antecedent rivers कहा जाता है।

  • सिंधु गॉर्ज, सतलुज गॉर्ज और दिहांग गॉर्ज इसके महत्त्वपूर्ण उदाहरण हैं।

तीव्र उत्थान और नदी द्वारा गहरे कटाव का संयुक्त प्रभाव तरुण पर्वतीय अवस्था का प्रमाण है।

2. यू-घुमाव वाले नदी मार्ग—सही

हिमालय में कई नदियाँ पर्वतीय अवरोधों, संरचनात्मक परिवर्तन, भ्रंशों और नदी-अपहरण के कारण तीव्र मोड़ अथवा यू-आकार के घुमाव बनाती हैं।

  • हिमालय के निर्माण के दौरान पर्वत श्रेणियों का उत्थान समान रूप से नहीं हुआ।

  • कई स्थानों पर नदी को उठती हुई पर्वत श्रेणी को काटना पड़ा, जबकि कुछ स्थानों पर उसका मार्ग संरचनात्मक नियंत्रण के अनुसार बदल गया।

  • ब्रह्मपुत्र का नामचा बरवा के पास तीव्र मोड़ और सिंधु का नंगा पर्वत के आसपास का मोड़ इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

ये आकृतियाँ सक्रिय विवर्तनिकी और अस्थिर स्थलाकृति को प्रदर्शित करती हैं।

3. समानान्तर पर्वत श्रेणियाँ—सही

हिमालय एक पर्वत श्रेणी नहीं, बल्कि लगभग समानान्तर रूप से विस्तृत अनेक पर्वत श्रेणियों की व्यवस्था है:

  • ट्रांस हिमालय

  • हिमाद्रि अथवा महान हिमालय

  • हिमाचल अथवा लघु हिमालय

  • शिवालिक

इन समानान्तर श्रेणियों का निर्माण भारतीय प्लेट के दबाव से चट्टानों के क्रमिक वलन, भ्रंशन और एक-दूसरे पर धकेले जाने से हुआ। इसलिए यह विशेषता हिमालय की वलित संरचना का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

4. तीव्र ढाल और भू-स्खलन—सही

हिमालय में तीव्र ढाल, कमजोर एवं अत्यधिक खंडित चट्टानें, सक्रिय भ्रंश, भूकंप और भारी वर्षा भू-स्खलन की संभावना बढ़ाते हैं।

  • भूगर्भीय रूप से युवा पर्वतों की ढालें अभी पूर्ण रूप से स्थिर नहीं हुई हैं।

  • नदियों द्वारा आधार का कटाव और सड़क निर्माण जैसी मानवीय गतिविधियाँ भी ढालों को अस्थिर करती हैं।

  • इसलिए हिमालय विश्व के सर्वाधिक भू-स्खलन-प्रवण पर्वतीय क्षेत्रों में शामिल है।

अतः चारों विशेषताएँ हिमालय के तरुण वलित पर्वत होने का साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं।

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