Previous Year Question
भारत के संदर्भ में, ‘हल्बी, हो और कुई’ पद किससे संबंधित हैं?
पश्चिमोत्तर भारत का नृत्य रूप
वाद्ययंत्र
प्रागैतिहासिक गुफा चित्रकला
जनजातीय भाषाएँ
Correct Answer: D
Detailed Solution
हल्बी, हो और कुई भारत के विभिन्न जनजातीय समुदायों द्वारा बोली जाने वाली भाषाएँ हैं। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि ये तीनों एक ही भाषा-परिवार की भाषाएँ नहीं हैं।
भाषा | भाषा-परिवार | प्रमुख क्षेत्र/समुदाय | लिपि संबंधी तथ्य |
हल्बी | हिन्द-आर्य | छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के जनजातीय क्षेत्र | देवनागरी और ओड़िया |
हो | ऑस्ट्रो-एशियाटिक की उत्तर मुंडा शाखा | मुख्यतः झारखंड और ओडिशा का हो समुदाय | वारंग चिति; देवनागरी और ओड़िया का भी प्रयोग |
कुई | दक्षिण-मध्य द्रविड़ | मुख्यतः ओडिशा का कंध/खोंड समुदाय | सामान्यतः ओड़िया लिपि |
हल्बी
हल्बी को हलाबी, बस्तरी, हल्बा और हलवास जैसे नामों से भी जाना जाता है।
यह हिन्द-आर्य भाषा-परिवार की एक गैर-अनुसूचित भारतीय भाषा है।
यह मध्य भारत के छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में बोली जाती है।
इसे देवनागरी और ओड़िया लिपियों में लिखा जाता है।
केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान के अनुसार 2011 की जनगणना में इसके 7,66,297 वक्ता दर्ज किए गए थे।
हो
हो भाषा ऑस्ट्रो-एशियाटिक भाषा-परिवार की उत्तर मुंडा शाखा से संबंधित है।
यह मुख्यतः झारखंड और ओडिशा के हो समुदाय द्वारा बोली जाती है।
यह मुंडारी और संताली से भाषायी रूप से संबंधित है।
हो भाषा के लिए वारंग चिति लिपि विकसित की गई, जिसका संबंध लाको बोदरा से है।
इसके लेखन में देवनागरी, ओड़िया और रोमन लिपियों का भी प्रयोग होता है।
कुई
कुई दक्षिण-मध्य द्रविड़ भाषा है।
यह मुख्यतः ओडिशा के कंध अथवा खोंड जनजातीय समुदाय द्वारा बोली जाती है।
यह गोंडी और कुवी भाषाओं से निकटता रखती है।
इसके लेखन में मुख्यतः ओड़िया लिपि का प्रयोग किया जाता है।
परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण अंतर
“जनजातीय भाषा” एक सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान है, कोई अलग भाषा-परिवार नहीं। इसीलिए जनजातीय समुदायों द्वारा बोली जाने वाली भाषाएँ अलग-अलग भाषा-परिवारों से संबंधित हो सकती हैं:
हल्बी — हिन्द-आर्य
हो — ऑस्ट्रो-एशियाटिक
कुई — द्रविड़
इन तीनों में से कोई भी भाषा वर्तमान में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं है। अतः सही उत्तर (d) जनजातीय भाषाएँ है।