JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

GEOGRAPHY · 2011

Previous Year Question

सूक्ष्म-सिंचाई की पद्धति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?

  1. मृदा से उर्वरक/पोषक हानि कम की जा सकती है।

  2. यह वर्षाधीन खेती की सिंचाई का एकमात्र साधन है।

  3. इससे कुछ कृषि क्षेत्रों में भौम जलस्तर को कम होने से रोका जा सकता है।

निम्नलिखित कूटों के आधार पर सही उत्तर चुनिए :

A.

केवल 1

B.

केवल 2 और 3

C.

केवल 1 और 3

D.

1, 2 और 3

Correct Answer: C

Detailed Solution

सूक्ष्म-सिंचाई में मुख्यतः ड्रिप तथा सूक्ष्म-स्प्रिंकलर प्रणालियाँ आती हैं। इनमें कम मात्रा में जल को नियंत्रित दर से पौधे के जड़-क्षेत्र में या उसके निकट पहुँचाया जाता है।

1. मृदा से उर्वरक/पोषक हानि कम की जा सकती है — सही

  • ड्रिप प्रणाली के माध्यम से जल के साथ घुलनशील उर्वरक देने को फर्टिगेशन कहते हैं।

  • इसमें पौधे की आवश्यकता के अनुसार उर्वरक छोटी और नियंत्रित मात्राओं में जड़-क्षेत्र तक पहुँचाया जा सकता है।

  • इससे सतही अपवाह, जड़-क्षेत्र से नीचे गहरे रिसाव, वाष्पीकरण तथा अनुपयोगी स्थानों पर उर्वरक पहुँचने की संभावना कम होती है।

  • इसलिए पोषक तत्त्वों की हानि कम और जल एवं उर्वरक-उपयोग दक्षता अधिक हो सकती है।

2. यह वर्षाधीन खेती की सिंचाई का एकमात्र साधन है — गलत

  • वर्षाधीन खेती मुख्यतः वर्षा और मृदा में संचित नमी पर निर्भर करती है।

  • इसमें वर्षाजल-संग्रहण, नमी-संरक्षण, सूखा-सहिष्णु फसलें तथा आवश्यकता पड़ने पर जीवनरक्षक या पूरक सिंचाई भी अपनाई जा सकती है।

  • पूरक सिंचाई ड्रिप, स्प्रिंकलर या उपलब्ध परिस्थितियों के अनुसार अन्य विधियों से भी दी जा सकती है।

  • अतः सूक्ष्म-सिंचाई उपयोगी हो सकती है, लेकिन वह सिंचाई का “एकमात्र” साधन नहीं है।

3. कुछ कृषि क्षेत्रों में भौम जलस्तर को कम होने से रोका जा सकता है — सही

  • सूक्ष्म-सिंचाई जल को आवश्यक स्थान और नियंत्रित मात्रा में देती है, जिससे वितरण, अपवाह और वाष्पीकरण संबंधी हानियाँ घटती हैं।

  • समान उत्पादन के लिए कम जल निकालना पड़े तो भूजल पर दबाव कम हो सकता है और जलस्तर के अवनमन को कुछ क्षेत्रों में धीमा या नियंत्रित किया जा सकता है।

  • कथन में “कुछ कृषि क्षेत्रों में” और “रोका जा सकता है” कहा गया है; यह सार्वभौमिक दावा नहीं है।

  • यदि बचाए गए जल से सिंचित क्षेत्र बढ़ा दिया जाए या अधिक जल माँगने वाली फसलें उगाई जाएँ, तो कुल भूजल-दोहन कम होना आवश्यक नहीं है। इसलिए उचित फसल और भूजल-प्रबंधन भी जरूरी है।

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