Previous Year Question
निम्नलिखित कृषि पद्धतियों पर विचार कीजिए :
समोच्च बाँध
अनुपद सस्यन
शून्य जुताई
वैश्विक जलवायु परिवर्तन के सन्दर्भ में, उपर्युक्त में से कौन-सा/से मृदा में कार्बन प्रच्छादन/संग्रहण में सहायक है/हैं?
केवल 1 और 2
केवल 3
1, 2 और 3
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: B
Detailed Solution
कार्बन प्रच्छादन/संग्रहण का अर्थ वायुमंडलीय कार्बन को पौधों के माध्यम से ग्रहण करके उसे मृदा के जैविक कार्बन भंडार में अपेक्षाकृत लंबे समय तक सुरक्षित रखना है।
1. समोच्च बाँध — गलत
इसमें समान ऊँचाई वाली समोच्च रेखाओं के साथ मिट्टी या पत्थर के बाँध बनाए जाते हैं।
इसका प्राथमिक उद्देश्य ढाल पर बहने वाले जल की गति कम करना, अपवाह नियंत्रित करना, मृदा अपरदन रोकना तथा मृदा में नमी बढ़ाना है।
इससे कार्बनयुक्त ऊपरी मृदा के बह जाने को कम किया जा सकता है, लेकिन केवल समोच्च बाँध बनाने से वायुमंडलीय कार्बन का मृदा में शुद्ध और सुनिश्चित संग्रहण नहीं होता।
2. अनुपद सस्यन — गलत
अनुपद सस्यन अर्थात् पहली फसल की कटाई से पहले ही उसी खेत में अगली फसल बो देना।
इससे खेत में वनस्पति आवरण अधिक समय तक बना रह सकता है और जड़ों या अवशेषों द्वारा कार्बनिक पदार्थ मिल सकता है।
परंतु मृदा में कार्बन वास्तव में बढ़ेगा या नहीं, यह फसल के प्रकार, अवशेषों को खेत में रखने या हटाने, जुताई तथा भूमि-प्रबंधन पर निर्भर करता है।
अतः अनुपद सस्यन अपने आप में सुनिश्चित कार्बन-संग्रहण पद्धति नहीं है।
3. शून्य जुताई — सही
इसमें बीज बोने के लिए मृदा को व्यापक रूप से पलटा या जोता नहीं जाता।
कम मृदा-विक्षोभ से मृदा जैविक पदार्थ का वायु के संपर्क में आकर तेजी से ऑक्सीकरण और अपघटन कम होता है।
इससे कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में कार्बन की हानि कम हो सकती है।
फसल-अवशेष सतह पर रहने से जैविक पदार्थ की आपूर्ति, मृदा समुच्चयों की स्थिरता और सतही मृदा में कार्बन का संरक्षण बढ़ता है।
इसका वास्तविक प्रभाव जलवायु, मृदा, फसल-चक्र, अवशेष प्रबंधन और मृदा की मापी गई गहराई पर निर्भर करता है; फिर भी दिए गए विकल्पों में यही मान्य कार्बन-संग्रहण पद्धति है।