Previous Year Question
“यह फसल उपोष्ण प्रकृति की है । उसके लिए कठोर पाला हानिकारक है । विकास के लिए उसे कम-से-कम 210 पाला-रहित दिवसों और 50 – 100 सेंटीमीटर वर्षा की आवश्यकता पड़ती है । हल्की सुअपवाहित मृदा जिसमें नमी धारण करने की क्षमता है उसकी खेती के लिए आदर्श रूप से अनुकूल है ।” यह फसल निम्नलिखित में से कौन-सी है ?
कपास
जूट
गन्ना
चाय
Correct Answer: A
Detailed Solution
प्रश्न में बताई गई सभी भौगोलिक दशाएँ कपास की खेती से संबंधित हैं।
1. उपोष्ण प्रकृति और तापमान
कपास मूलतः उष्ण एवं उपोष्ण क्षेत्रों की फसल है।
इसकी वृद्धि के लिए सामान्यतः उच्च तापमान और तेज धूप की आवश्यकता होती है।
भारत में इसे मुख्यतः खरीफ फसल के रूप में उगाया जाता है।
2. कम-से-कम 210 पाला-रहित दिन
कपास का पौधा पाले के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है।
कठोर पाला पौधे की कोशिकाओं, नई वृद्धि, फूलों और विकसित हो रहे कपास-कोषों को क्षति पहुँचा सकता है।
इसकी लंबी वृद्धि-अवधि के कारण लगभग 210 पाला-रहित दिवस महत्त्वपूर्ण होते हैं।
प्रश्न में दिया गया यह संकेत कपास की पहचान करने के लिए सबसे निर्णायक है।
3. वर्षा की आवश्यकता
कपास को लगभग 50–100 सेंटीमीटर वर्षा अथवा उसके बराबर सिंचाई की आवश्यकता हो सकती है।
पौधे की प्रारंभिक वृद्धि के समय पर्याप्त नमी आवश्यक होती है।
लेकिन कपास-कोषों के परिपक्व होने और खुलने के समय शुष्क मौसम तथा तेज धूप लाभकारी होती है।
कोषों के खुलने के समय वर्षा होने पर कपास की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
4. मृदा संबंधी दशाएँ
कपास के लिए ऐसी मृदा उपयोगी होती है जिसमें नमी धारण करने की क्षमता हो, लेकिन जल-निकास भी अच्छा हो।
भारत के दक्कन पठार की गहरी काली अथवा रेगुर मृदा कपास के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
काली मृदा में चिकनी मिट्टी का अनुपात अधिक होने के कारण नमी धारण करने की क्षमता अधिक होती है।
उचित जल-निकास वाली जलोढ़ एवं दोमट मृदाओं में भी कपास उगाई जा सकती है।
खेत में लंबे समय तक जलभराव कपास की जड़ों और पौध-वृद्धि के लिए हानिकारक होता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
जूट: इसे गर्म और अत्यधिक आर्द्र जलवायु, अधिक वर्षा तथा बाढ़ के मैदानों की उपजाऊ जलोढ़ मृदा की आवश्यकता होती है।
गन्ना: यह गर्म और आर्द्र जलवायु में उगने वाली दीर्घावधि फसल है तथा इसकी जल-आवश्यकता सामान्यतः कपास से अधिक होती है।
चाय: इसे गर्म एवं नम पाला-रहित जलवायु, पूरे वर्ष वितरित वर्षा तथा ह्यूमस-समृद्ध, अम्लीय और सुवाहित मृदा की आवश्यकता होती है।
अतिरिक्त तथ्य
कपास एक प्रमुख रेशेदार एवं नकदी फसल है।
कपास का रेशा वास्तव में बीजों की बाहरी सतह पर विकसित होने वाले लंबे रोएँ होते हैं।
कपास-कोष से बीजों और रेशों को अलग करने की प्रक्रिया को ओटना या जिनिंग कहा जाता है।
भारत में कपास सामान्यतः लगभग 6–8 महीने में परिपक्व होती है।