Previous Year Question
स्थायी कृषि (पर्माकल्चर), पारंपरिक रासायनिक कृषि से किस तरह भिन्न है?
स्थायी कृषि एकधान्य कृषि पद्धति को हतोत्साहित करती है, किंतु पारंपरिक रासायनिक कृषि में एकधान्य कृषि पद्धति की प्रबलता है।
पारंपरिक रासायनिक कृषि के कारण मृदा की लवणता में वृद्धि हो सकती है, किंतु इस तरह की परिघटना स्थायी कृषि में दृष्टिगोचर नहीं होती है।
पारंपरिक रासायनिक कृषि अर्धशुष्क क्षेत्रों में आसानी से संभव है, किंतु ऐसे क्षेत्रों में स्थायी कृषि इतनी आसानी से संभव नहीं है।
मल्च बनाने (मल्चिंग) की प्रथा स्थायी कृषि में काफी महत्त्वपूर्ण है, किंतु पारंपरिक रासायनिक कृषि में ऐसी प्रथा आवश्यक नहीं है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
1 और 3
1, 2 और 4
केवल 4
2 और 3
Correct Answer: B
Detailed Solution
पर्माकल्चर का अर्थ
पर्माकल्चर एक ऐसी कृषि एवं भू-दृश्य डिजाइन पद्धति है, जिसमें प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों की विविधता, स्थिरता और पुनर्चक्रण का अनुकरण किया जाता है।
इसमें बहुफसली खेती, कृषि वानिकी, बारहमासी पौधे, पशुपालन, जल-संग्रह, कम्पोस्टिंग और पोषक तत्त्वों के स्थानीय पुनर्चक्रण को जोड़ा जा सकता है।
यह केवल “रासायनिक उर्वरक न डालने” तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे खेत को परस्पर जुड़े तंत्र के रूप में डिजाइन करती है।
कथन 1—सही
पर्माकल्चर सामान्यतः एकधान्य अथवा मोनोकल्चर के स्थान पर पॉलीकल्चर एवं जैव-विविधता को प्रोत्साहित करती है।
विभिन्न फसलें, वृक्ष, झाड़ियाँ, पशु और लाभकारी जीव एक-दूसरे को पोषक तत्त्व, आश्रय एवं कीट-नियंत्रण जैसी पारिस्थितिक सेवाएँ प्रदान कर सकते हैं।
पारंपरिक रासायनिक कृषि में बड़े क्षेत्र पर एक ही फसल उगाना अधिक प्रचलित है, क्योंकि इससे मशीनीकरण और मानकीकृत रासायनिक इनपुट का उपयोग आसान होता है।
कथन 2—सही
अधिक सिंचाई, अपर्याप्त जल-निकास और उर्वरकों में उपस्थित घुलनशील लवणों के कारण मृदा में लवण जमा हो सकते हैं।
यह समस्या विशेष रूप से शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों में अधिक होती है, जहाँ वर्षा मृदा से लवणों को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त नहीं होती।
पर्माकल्चर में मृदा आवरण, जैविक पदार्थ, जल-संचयन, विविध पौधरोपण और कृत्रिम इनपुट पर कम निर्भरता लवणीकरण का जोखिम घटाती है।
वैज्ञानिक दृष्टि से यह कहना कि पर्माकल्चर में लवणता कभी हो ही नहीं सकती, पूर्णतः निरपेक्ष दावा होगा; खारे जल या अनुचित जल-निकास से किसी भी खेत में लवणता हो सकती है।
कथन 3—गलत
पर्माकल्चर को अर्धशुष्क क्षेत्रों में भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जा सकता है।
इसके लिए वर्षाजल-संग्रह, कंटूर बंड/स्वेल, सूखा-सहिष्णु स्थानीय पौधे, कृषि वानिकी, जैविक पदार्थ और मल्च का उपयोग किया जाता है।
ये उपाय वर्षा के पानी को रोकते हैं, मिट्टी में उसका प्रवेश बढ़ाते हैं तथा वाष्पीकरण कम करते हैं।
इसलिए यह कहना गलत है कि पारंपरिक रासायनिक कृषि अर्धशुष्क क्षेत्रों में आसानी से संभव है, जबकि पर्माकल्चर नहीं।
कथन 4—सही
मल्च मिट्टी की सतह पर फैलाया गया फसल-अवशेष, पत्ती, घास, भूसा, लकड़ी के टुकड़े अथवा अन्य पदार्थ होता है।
पर्माकल्चर में मिट्टी को खुला न छोड़ना एक महत्त्वपूर्ण सिद्धांत है।
मल्च वाष्पीकरण और मृदा-अपरदन कम करता है, नमी सुरक्षित रखता है, तापमान नियंत्रित करता है, खरपतवार दबाता है तथा जैविक मल्च मृदा में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाता है।
पारंपरिक रासायनिक खेती में भी मल्च का प्रयोग किया जा सकता है, परंतु वह उस प्रणाली का अनिवार्य घटक नहीं है।