Previous Year Question
“मियावाकी पद्धति” किसके लिए विख्यात है?
शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वाणिज्यिक कृषि का संवर्धन
आनुवंशिकतः रूपांतरित पुष्पों का प्रयोग कर उद्यानों का विकास
शहरी क्षेत्रों में लघु वनों का सृजन
तटीय क्षेत्रों और समुद्री सतहों पर पवन ऊर्जा का संग्रहण
Correct Answer: C
Detailed Solution
मियावाकी पद्धति सीमित भूमि पर अत्यधिक सघन, बहुस्तरीय और मुख्यतः स्थानीय देशज प्रजातियों वाला वन विकसित करने की वनीकरण पद्धति है। इसलिए इसका प्रयोग विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में लघु अथवा मिनी वन बनाने के लिए किया जाता है।
इस पद्धति को जापानी वनस्पति-विज्ञानी अकीरा मियावाकी ने 1970 के दशक में विकसित किया था। इसका आधार किसी क्षेत्र की संभावित प्राकृतिक वनस्पति के समान पादप समुदाय तैयार करना है।
इसमें क्षेत्र की जलवायु और मृदा के अनुकूल देशज प्रजातियाँ चुनी जाती हैं। झाड़ियों, छोटे वृक्षों, मध्यम वृक्षों और ऊँचे वृक्षों को पास-पास लगाकर प्राकृतिक वन जैसी विभिन्न वनस्पति परतें बनाई जाती हैं।
सघन रोपण के कारण पौधों के बीच प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा होती है और वे पार्श्व दिशा की अपेक्षा ऊपर की ओर तेजी से बढ़ते हैं। घनी छत्रछाया बनने से खरपतवारों की वृद्धि भी कम होती है।
प्रारम्भिक वर्षों में सिंचाई, निराई और देखभाल आवश्यक होती है; स्थापित होने के बाद ऐसा वन तुलनात्मक रूप से स्वनिर्वहनीय बन सकता है। इससे जैव विविधता, पक्षियों एवं कीटों का आवास, कार्बन अवशोषण, मृदा-सुधार तथा नगरीय ताप-द्वीप प्रभाव को कम करने में सहायता मिल सकती है।