Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
वैश्विक सागर आयोग (ग्लोबल ओशन कमीशन) अंतर्राष्ट्रीय जल-क्षेत्र में समुद्र-संस्तरीय (सीबेड) खोज और खनन के लिए लाइसेंस प्रदान करता है।
भारत ने अंतर्राष्ट्रीय जल-क्षेत्र में समुद्र-संस्तरीय खनिज की खोज के लिए लाइसेंस प्राप्त किया है।
‘दुर्लभ मृदा खनिज (रेअर अर्थ मिनरल)’ अंतर्राष्ट्रीय जल-क्षेत्र में समुद्र अधस्तल पर उपलब्ध हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer: B
Detailed Solution
कथन 1 गलत है: वैश्विक सागर आयोग या Global Ocean Commission समुद्र तल के खनिजों की खोज अथवा खनन के लिए लाइसेंस देने वाला नियामक प्राधिकरण नहीं था। यह 2013 में स्थापित एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय पहल थी, जिसका उद्देश्य खुले समुद्रों के क्षरण की ओर ध्यान आकर्षित करना और समुद्री प्रशासन में सुधार के लिए सुझाव देना था।
राष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र से बाहर स्थित अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल में खनिज संसाधनों से संबंधित गतिविधियों को संगठित और नियंत्रित करने वाला निकाय अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण (International Seabed Authority—ISA) है। इसका गठन संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय—UNCLOS के अंतर्गत किया गया है।
कथन 2 सही है: भारत ने ISA के साथ मध्य हिंद महासागर बेसिन में बहुधात्विक पिंडों के अन्वेषण के लिए अनुबंध प्राप्त किया था। प्रारम्भिक अन्वेषण अनुबंध 25 मार्च 2002 को किया गया था। इसे 2017 में तथा पुनः 2022 में पाँच-पाँच वर्षों के लिए विस्तारित किया गया। भारत के पास हिंद महासागर रिज में बहुधात्विक सल्फाइड के अन्वेषण का एक अन्य अनुबंध भी है।
बहुधात्विक पिंड समुद्र तल पर पाए जाने वाले आलू के आकार जैसे खनिज निक्षेप होते हैं। इनमें मुख्य रूप से मैंगनीज़ और लोहा तथा आर्थिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण निकल, ताँबा और कोबाल्ट पाए जाते हैं।
कथन 3 सही है: अंतर्राष्ट्रीय जल-क्षेत्र के गहरे समुद्र तल पर पाए जाने वाले बहुधात्विक पिंडों और अन्य समुद्री निक्षेपों में दुर्लभ मृदा तत्व भी पाए जाते हैं। ISA के अनुसार, समुद्र तल के बहुधात्विक पिंडों में निकल, ताँबा, कोबाल्ट और मैंगनीज़ के साथ दुर्लभ मृदा तत्वों की उपस्थिति के कारण इनके खनन में रुचि बढ़ी है।