Previous Year Question
निम्नलिखित भारी उद्योगों पर विचार कीजिए :
उर्वरक संयंत्र
तेल शोधनशालाएँ
इस्पात संयंत्र
ग्रीन हाइड्रोजन उपर्युक्त उद्योगों में से कितने उद्योगों को कार्बनमुक्त करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपेक्षा है?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
कोई नहीं
Correct Answer: C
Detailed Solution
ग्रीन हाइड्रोजन उर्वरक संयंत्रों, तेल शोधनशालाओं और इस्पात संयंत्रों—तीनों के डीकार्बोनाइजेशन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसलिए विकल्प C सही है।
1. उर्वरक संयंत्र: अमोनिया यूरिया जैसे नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों के उत्पादन का प्रमुख आधार है। अमोनिया के निर्माण के लिए हाइड्रोजन की आवश्यकता होती है। वर्तमान में यह हाइड्रोजन मुख्यतः प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों से प्राप्त किया जाता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। इसके स्थान पर नवीकरणीय ऊर्जा से निर्मित ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग करके ग्रीन अमोनिया बनाया जा सकता है। इसलिए उर्वरक उद्योग का कार्बन उत्सर्जन घटाया जा सकता है।
2. तेल शोधनशालाएँ: शोधनशालाओं में हाइड्रोजन का उपयोग कच्चे तेल से सल्फर हटाने वाली हाइड्रो-डीसल्फराइजेशन तथा भारी हाइड्रोकार्बनों को हल्के उत्पादों में बदलने वाली हाइड्रोक्रैकिंग प्रक्रियाओं में किया जाता है। वर्तमान में प्रयुक्त अधिकांश हाइड्रोजन जीवाश्म ईंधनों से बनता है। इसे ग्रीन हाइड्रोजन से प्रतिस्थापित करने पर शोधन प्रक्रिया से संबंधित उत्सर्जन कम किया जा सकता है।
3. इस्पात संयंत्र: परंपरागत ब्लास्ट फर्नेस आधारित इस्पात उत्पादन में कोक का उपयोग ईंधन और अपचायक दोनों के रूप में किया जाता है, जिससे बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है। हाइड्रोजन-आधारित प्रत्यक्ष अपचय प्रक्रिया में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग लौह अयस्क से ऑक्सीजन हटाने के लिए किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड के स्थान पर मुख्यतः जलवाष्प बनती है। इससे इस्पात उद्योग के उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी सम्भव है।
अतः ग्रीन हाइड्रोजन तीनों दिए गए भारी उद्योगों को कार्बनमुक्त करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।