JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

GEOGRAPHY · 2011

Previous Year Question

यदि उष्णकटिबंधीय वर्षा-वन काट दिया जाए, तो यह उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन की तुलना में शीघ्र पुनर्योजित नहीं हो पाता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि:

A.

वर्षा-वन की मृदा में पोषकों का अभाव होता है

B.

वर्षा-वन में वृक्षों के प्रवर्ध्यों की जीवनक्षमता दुर्बल होती है

C.

वर्षा-वन की जातियाँ धीमी गति से बढ़ती हैं

D.

विदेशज जातियाँ वर्षा-वन की उर्वर मृदा पर अतिक्रमण कर जाती हैं

Correct Answer: A

Detailed Solution

  1. उष्णकटिबंधीय वर्षा-वन की अधिकांश पोषक सामग्री मृदा में संचित रहने के बजाय पेड़-पौधों के जीवित जैवभार और सतह पर उपस्थित कार्बनिक पदार्थ में होती है। पोषक तत्त्व वनस्पति और अपघटित कार्बनिक पदार्थ के बीच तेजी से चक्रित होते रहते हैं।

  2. वर्षभर होने वाली भारी वर्षा के कारण मृदा का तीव्र रासायनिक अपक्षय और निक्षालन (leaching) होता है। घुलनशील पोषक तत्त्व मृदा की निचली परतों में चले जाते हैं अथवा बह जाते हैं। इसलिए घनी वनस्पति के बावजूद वर्षा-वन की मृदा प्रायः अत्यधिक अपक्षयित, अम्लीय और पोषक तत्त्वों की दृष्टि से निर्धन होती है।

  3. वन काटे जाने पर पेड़-पौधों का जैवभार, पत्तियों की परत और जड़ों का जाल नष्ट हो जाता है। इससे वन का तीव्र एवं लगभग बंद पोषक-चक्र टूट जाता है।

  4. वनस्पति आवरण हटने के बाद मृदा सीधे भारी वर्षा के संपर्क में आती है। इससे पोषक तत्त्वों का निक्षालन और मृदा-अपरदन बढ़ जाता है तथा नए पौधों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। इसलिए वर्षा-वन शीघ्र पुनर्योजित नहीं होता।

  5. उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन में शुष्क ऋतु और मौसमी पर्णपात के कारण वर्षा-वन की तुलना में लगातार निक्षालन कम होता है तथा गिरी हुई पत्तियों से मृदा में पोषक तत्त्व जुड़ते हैं। इसलिए वह तुलनात्मक रूप से जल्दी पुनर्योजित हो सकता है।

  6. विकल्प (b) गलत है क्योंकि वर्षा-वन के सभी वृक्षों के प्रवर्ध्यों की जीवनक्षमता स्वाभाविक रूप से दुर्बल नहीं होती। विकल्प (c) भी सामान्य नियम नहीं है, क्योंकि अनेक अग्रणी वर्षा-वन जातियाँ तेजी से बढ़ती हैं। विकल्प (d) का आधार गलत है क्योंकि वर्षा-वन की मृदा सामान्यतः उर्वर नहीं, बल्कि पोषक तत्त्वों से निर्धन होती है। अतः सही उत्तर (a) है।

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