Previous Year Question
निम्नलिखित स्थितियों में से किस एक में “जैवशैल प्रौद्योगिकी (बायोरॉक टेक्नोलॉजी)” की बातें होती हैं?
क्षतिग्रस्त प्रवाल भित्तियों (कोरल रीफ्स) की बहाली
पादप अवशिष्टों का प्रयोग कर भवन-निर्माण सामग्री का विकास
शेल गैस के अन्वेषण/निष्कर्षण के लिए क्षेत्रों की पहचान करना
वनों/संरक्षित क्षेत्रों में जंगली पशुओं के लिए लवण-लेहिकाएँ (साल्ट लिक्स) उपलब्ध कराना
Correct Answer: A
Detailed Solution
बायोरॉक प्रौद्योगिकी को खनिज अभिवृद्धि प्रौद्योगिकी भी कहा जाता है। इसका प्रयोग क्षतिग्रस्त प्रवाल भित्तियों और अन्य समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों की बहाली के लिए किया जाता है।
इस प्रक्रिया में समुद्र तल पर विद्युत्-सुचालक धातु का ढाँचा स्थापित किया जाता है और उसमें सुरक्षित निम्न-वोल्टता वाली प्रत्यक्ष विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है।
विद्युत् धारा के प्रभाव से समुद्री जल में घुले कैल्शियम और मैग्नीशियम के खनिज धातु के ढाँचे पर निक्षेपित होने लगते हैं। इससे चूना-पत्थर जैसी कठोर खनिज परत बनती है, जिसे बायोरॉक कहा जाता है।
जीवित प्रवाल के छोटे टुकड़ों को इस खनिजयुक्त ढाँचे से जोड़ा जाता है। यह ढाँचा प्रवालों को स्थिर आधार देता है तथा उनकी वृद्धि, उपचार और प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायता करता है।
इस तकनीक से प्रवालों के अतिरिक्त समुद्री घास, मैन्ग्रोव, सीप और अन्य समुद्री जीवों के आवासों की बहाली में भी सहायता मिल सकती है।
अन्य विकल्प बायोरॉक प्रौद्योगिकी से संबंधित नहीं हैं। इसका प्रयोग न तो पादप अवशेषों से भवन सामग्री बनाने, न शेल गैस क्षेत्रों की पहचान करने और न वन्य पशुओं के लिए लवण-लेहिकाएँ बनाने के लिए किया जाता है।