Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: उष्णकटिबंधीय वर्षावनों की मृदा पोषक तत्त्वों से भरपूर होती है।
कथन-II: उष्णकटिबंधीय वर्षावनों के उच्च ताप और आर्द्रता के कारण मृदा में विद्यमान मृत जैव पदार्थ का द्रुत अपघटन होता है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?
कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या है
कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या नहीं है
कथन-I सही है, किन्तु कथन-II गलत है
कथन-I गलत है, किन्तु कथन-II सही है
Correct Answer: D
Detailed Solution
कथन-I गलत है। उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में वनस्पति अत्यधिक घनी होती है, लेकिन उनकी मृदा सामान्यतः पोषक तत्त्वों से भरपूर नहीं होती। अधिक तापमान और अत्यधिक वर्षा के कारण मृदा का तीव्र अपक्षय तथा पोषक तत्त्वों का निक्षालन होता है।
वर्षा का जल कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे घुलनशील पोषक तत्त्वों को मृदा की ऊपरी परत से नीचे ले जाता है। इस प्रक्रिया को निक्षालन या लीचिंग कहा जाता है।
वर्षावन पारिस्थितिकी तंत्र के अधिकांश पोषक तत्त्व मृदा में संचित रहने के बजाय जीवित वनस्पति में पाए जाते हैं। अपघटन से मुक्त हुए पोषक तत्त्वों को पौधों की जड़ें शीघ्रता से ग्रहण कर लेती हैं।
कथन-II सही है। पूरे वर्ष उपलब्ध उच्च तापमान और पर्याप्त आर्द्रता जीवाणुओं, कवकों तथा अन्य अपघटकों की सक्रियता को बढ़ाती है। इसलिए गिरी हुई पत्तियों और अन्य मृत जैव पदार्थ का अपघटन बहुत तेजी से होता है।
तीव्र अपघटन के कारण वन-तल पर मोटी पत्ती-कूड़ा परत एकत्रित नहीं हो पाती। फिर भी इसका यह अर्थ नहीं है कि मृदा पोषक तत्त्वों से समृद्ध होती है, क्योंकि पोषक तत्त्वों का तेजी से जैविक ग्रहण और निक्षालन होता रहता है।