JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

GEOGRAPHY · 2011

Previous Year Question

मृदा का लवणीभवन मृदा में एकत्रित सिंचित जल के वाष्पीकृत होने से पीछे छूटे नमक और खनिजों से उत्पन्न होता है। सिंचित भूमि पर लवणीभवन का क्या प्रभाव पड़ता है?

A.
यह फसलों के उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि लाता है
B.
यह कुछ मृदाओं को अपारगम्य बना देता है
C.
यह भौम जलस्तर को ऊपर ले आता है
D.
यह मृदा के वायु अवकाशों को जल से भर देता है

Correct Answer: B

Detailed Solution

  1. सिंचाई के जल में कुछ मात्रा में घुलनशील लवण पाए जाते हैं। वाष्पीकरण और पौधों द्वारा वाष्पोत्सर्जन के दौरान जल तो मृदा से निकल जाता है, लेकिन लवण वहीं रह जाते हैं। बार-बार सिंचाई, अधिक वाष्पीकरण और अपर्याप्त जल-निकास से ये लवण जड़-क्षेत्र में संचित होने लगते हैं।

  1. अधिक लवणता मृदा-विलयन का परासरण दाब बढ़ा देती है। इससे पौधों के लिए मृदा से जल ग्रहण करना कठिन हो जाता है तथा बीज-अंकुरण, पौध-वृद्धि और फसल उत्पादन में कमी आती है। इसलिए विकल्प (a) गलत है।

  1. विशेष रूप से सोडियम से प्रभावित मृदाओं में मृदा के सूक्ष्म कण फैलकर बिखर जाते हैं। इससे मृदा-समुच्चय नष्ट होते हैं, मृदा के छिद्र अवरुद्ध हो जाते हैं तथा जल-अंतःस्यंदन और पारगम्यता अत्यधिक कम हो जाती है। इस प्रकार कुछ मृदाएँ लगभग अपारगम्य हो सकती हैं।

  1. भौम जलस्तर का ऊपर आना और मृदा के वायु अवकाशों का जल से भरना जलभराव की विशेषताएँ हैं। जलभराव लवणीभवन को बढ़ा सकता है, लेकिन ये लवणीभवन के प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं हैं।

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