JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

GEOGRAPHY · 2011

Previous Year Question

अफ्रीकी और यूरेशियाई मरुस्थल पट्टी के निर्माण का मुख्य कारण/कारण क्या हो सकता है/हो सकते हैं?

  1. यह उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब कोशिकाओं में स्थित है।

  2. यह गर्म समुद्री धाराओं के प्रभाव में है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A.
केवल 1
B.
केवल 2
C.
1 और 2 दोनों
D.
न तो 1 और न ही 2

Correct Answer: A

Detailed Solution

कथन 1 सही है: अफ्रीकी और यूरेशियाई मरुस्थल पट्टी का बड़ा भाग लगभग 20° से 30° उत्तरी अक्षांशों के बीच स्थित है। इसमें सहारा, अरब और ईरानी मरुस्थलीय क्षेत्र सम्मिलित हैं। यह क्षेत्र उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब पट्टी से संबंधित है।

इसकी प्रक्रिया:

  • विषुवतीय क्षेत्र में गर्म वायु ऊपर उठती है।

  • ऊपरी वायुमंडल में यह वायु उपोष्ण अक्षांशों की ओर बढ़ती है।

  • लगभग 30° अक्षांशों पर वायु नीचे उतरती है।

  • नीचे उतरते समय बढ़ते दाब के कारण वायु संपीडित होकर रुद्धोष्म रूप से गर्म होती है।

  • वायु के गर्म होने से उसकी सापेक्ष आर्द्रता घटती है तथा संघनन और बादल निर्माण बाधित होते हैं।

  • परिणामस्वरूप वर्षा बहुत कम होती है और मरुस्थलीय दशाएँ विकसित होती हैं।

कथन 2 गलत है: गर्म समुद्री धाराएँ सामान्यतः वायु को गर्म करके वाष्पीकरण और नमी की उपलब्धता बढ़ाती हैं। मरुस्थलीय परिस्थितियों को बढ़ावा देने वाली तटीय धाराएँ प्रायः ठंडी समुद्री धाराएँ होती हैं। उदाहरण के लिए, कैनरी की ठंडी धारा अफ्रीका के उत्तर-पश्चिमी तट की शुष्कता को सुदृढ़ करती है।

हालाँकि ठंडी समुद्री धाराएँ कुछ तटीय मरुस्थलों में सहायक होती हैं, अफ्रीकी और यूरेशियाई मरुस्थल पट्टी के निर्माण का मुख्य व्यापक कारण उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब और अवरोही शुष्क वायु है।

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