Previous Year Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
उच्च मेघ मुख्यतः सौर विकिरण को परावर्तित करते हैं और पृथ्वी की सतह को ठंडा करते हैं।
निम्न मेघों में पृथ्वी की सतह से उत्सर्जित अवरक्त विकिरण का उच्च अवशोषण होता है और इस प्रकार उष्मन प्रभाव उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
Correct Answer: D
Detailed Solution
मेघ पृथ्वी के ऊर्जा-संतुलन को दो विपरीत प्रक्रियाओं द्वारा प्रभावित करते हैं:
आने वाले लघु-तरंग सौर विकिरण को अंतरिक्ष में परावर्तित करके शीतलन करते हैं।
पृथ्वी से निकलने वाले दीर्घ-तरंग अवरक्त विकिरण को अवशोषित और पुनः उत्सर्जित करके उष्मन करते हैं।
मेघ का शुद्ध प्रभाव उसकी ऊँचाई, मोटाई, तापमान तथा जल-बूँदों या हिम-कणों की मात्रा पर निर्भर करता है।
कथन 1 गलत है:
सिरस जैसे उच्च मेघ सामान्यतः पतले होते हैं और उनमें हिम-कण पाए जाते हैं।
इनके पतले होने के कारण अधिकांश आने वाला सौर विकिरण इनसे होकर पृथ्वी की सतह तक पहुँच जाता है; अतः ये सौर विकिरण के प्रभावी परावर्तक नहीं होते।
उच्च मेघ अत्यधिक ठंडे होते हैं और पृथ्वी से निकलने वाले अवरक्त विकिरण को अवशोषित करके उसे बहुत कम तापमान पर अंतरिक्ष में पुनः उत्सर्जित करते हैं।
इससे बहिर्गामी ऊर्जा कम होती है और इनका सामान्य शुद्ध प्रभाव उष्मन होता है, न कि शीतलन।
कथन 2 गलत है:
निम्न और मोटे मेघ आने वाले सौर विकिरण का बड़ा भाग अंतरिक्ष में परावर्तित करते हैं।
निम्न मेघ अवरक्त विकिरण को भी अवशोषित करते हैं, लेकिन उनका तापमान पृथ्वी की सतह के तापमान के अपेक्षाकृत निकट होता है। इसलिए उनका ग्रीनहाउस या उष्मन प्रभाव उच्च मेघों की तुलना में कमजोर होता है।
सौर विकिरण के प्रबल परावर्तन का शीतलन प्रभाव उनके अवरक्त उष्मन प्रभाव से अधिक होता है। अतः निम्न मेघों का सामान्य शुद्ध प्रभाव शीतलन होता है।
इसलिए प्रश्न में उच्च और निम्न मेघों के प्रमुख प्रभाव परस्पर उलट दिए गए हैं और दोनों कथन गलत हैं।