Previous Year Question
“कोरिओलिस बल” के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
यह पवन वेग में वृद्धि के साथ बढ़ता है।
यह ध्रुवों पर अधिकतम होता है और भूमध्य रेखा पर अनुपस्थित होता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
Correct Answer: C
Detailed Solution
कोरिओलिस बल पृथ्वी के घूर्णन के कारण गतिमान पवनों, महासागरीय धाराओं और अन्य गतिशील वस्तुओं पर दिखाई देने वाला एक आभासी बल है।
इसका परिमाण निम्न संबंध से समझा जा सकता है:
Fc = 2mΩv sin 𝛷
जहाँ m वस्तु का द्रव्यमान, Ω पृथ्वी की कोणीय गति, v वस्तु या पवन का वेग तथा 𝛷 अक्षांश है।
कथन 1 सही है: कोरिओलिस बल पवन के वेग के समानुपाती है। पवन का वेग बढ़ने पर उसका कोरिओलिस विक्षेपण भी बढ़ता है। स्थिर वस्तु पर कोरिओलिस बल कार्य नहीं करता।
कथन 2 सही है:
भूमध्य रेखा पर अक्षांश 0° होता है और sin 0° = 0, इसलिए कोरिओलिस बल अनुपस्थित होता है।
ध्रुवों पर अक्षांश 90° होता है और sin 90° = 1, इसलिए कोरिओलिस बल अधिकतम होता है।
इसका प्रभाव भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ने पर क्रमशः बढ़ता जाता है।
कोरिओलिस बल के कारण गतिमान पवनें:
उत्तरी गोलार्द्ध में अपनी गति की दिशा के दाईं ओर विक्षेपित होती हैं।
दक्षिणी गोलार्द्ध में अपनी गति की दिशा के बाईं ओर विक्षेपित होती हैं।
यह बल पवन की दिशा बदलता है, परंतु स्वयं उसकी चाल को बढ़ाने या घटाने का कार्य नहीं करता।