Previous Year Question
निम्नलिखित कारकों पर विचार कीजिए :
पृथ्वी का घूर्णन
वायुदाब और पवन
महासागरीय जल का घनत्व
पृथ्वी का परिक्रमण
उपर्युक्त में से कौन-से कारक महासागरीय धाराओं को प्रभावित करते हैं?
Correct Answer: B
Detailed Solution
महासागरीय धाराएँ समुद्री जल की नियमित और निर्देशित गति हैं। सतही तथा गहरी महासागरीय धाराएँ अलग-अलग शक्तियों से संचालित होती हैं, लेकिन पृथ्वी का घूर्णन, पवन तथा जल के घनत्व में अंतर इनके प्रमुख कारक हैं।
1. पृथ्वी का घूर्णन—सही: पृथ्वी के घूर्णन से कोरिओलिस प्रभाव उत्पन्न होता है। इसके कारण गतिशील महासागरीय जल उत्तरी गोलार्द्ध में अपनी गति की दिशा के दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में बाईं ओर विक्षेपित होता है। कोरिओलिस प्रभाव धारा को आरंभ करने वाली प्राथमिक शक्ति नहीं है, लेकिन उसकी दिशा और बड़े महासागरीय चक्रों—गाइरों—की संरचना को प्रभावित करता है।
2. वायुदाब और पवन—सही: वायुदाब में अंतर से पवनें उत्पन्न होती हैं। समुद्र की सतह पर बहने वाली स्थायी पवनें घर्षण द्वारा जल को गति प्रदान करती हैं। व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें और ध्रुवीय पवनें बड़े पैमाने की सतही महासागरीय धाराओं को संचालित करती हैं। तटों के निकट पवनें अपवेलिंग और डाउनवेलिंग भी उत्पन्न कर सकती हैं।
3. महासागरीय जल का घनत्व—सही: समुद्री जल का घनत्व मुख्यतः तापमान और लवणता पर निर्भर करता है। ठंडा जल गर्म जल की तुलना में अधिक घना और अधिक लवणता वाला जल कम लवणता वाले जल से अधिक घना होता है। ठंडा तथा खारा जल नीचे डूबता है, जबकि अपेक्षाकृत गर्म अथवा कम खारा जल ऊपर उठता है। इससे गहरे महासागर की ताप-लवणीय परिसंचरण प्रणाली संचालित होती है।
4. पृथ्वी का परिक्रमण—सही नहीं: सूर्य के चारों ओर पृथ्वी का परिक्रमण ऋतुओं और मौसमी वायुमंडलीय दशाओं को प्रभावित करता है। इसके माध्यम से महासागरीय धाराओं पर अप्रत्यक्ष मौसमी प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन इसे घूर्णन, पवन और घनत्व की तरह धाराओं को प्रभावित करने वाला प्रत्यक्ष प्रमुख कारक नहीं माना गया है।
अन्य प्रभावकारी कारकों में तटरेखाओं तथा महासागरीय बेसिनों की आकृति, गुरुत्वाकर्षण, ज्वार और समुद्र-तल की स्थलाकृति भी सम्मिलित हैं।