JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

GEOGRAPHY · 2025

Previous Year Question

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

कथन I : वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि पृथ्वी के घूर्णन और अक्ष में बदलाव हो रहा है।

कथन II : सौर ज्वालाओं और संबंधित कोरोनाल द्रव्यमान निष्कासनों ने पृथ्वी के सबसे बाहरी वायुमंडल पर भारी मात्रा में ऊर्जा की बौछार की।

कथन III : जैसे-जैसे पृथ्वी की ध्रुवीय बर्फ पिघलती है, पानी भूमध्य रेखा की ओर बढ़ने लगता है।

उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

A.
कथन II और कथन III दोनों सही हैं और दोनों कथन I की व्याख्या करते हैं।
B.
कथन II और कथन III दोनों सही हैं, लेकिन उनमें से केवल एक कथन I की व्याख्या करता है।
C.
कथन II और कथन III में से केवल एक सही है और वह कथन I की व्याख्या करता है।
D.
न तो कथन II और न ही कथन III सही है।

Correct Answer: B

Detailed Solution

कथन I सही है। पृथ्वी का घूर्णन पूर्णतः स्थिर नहीं है। पृथ्वी की सतह और आंतरिक भाग में द्रव्यमान के पुनर्वितरण से उसकी घूर्णन गति तथा घूर्णन-अक्ष की स्थिति में सूक्ष्म परिवर्तन हो सकते हैं। हिमचादरों और हिमनदों का पिघलना, महासागरों में जल का पुनर्वितरण, भूजल का दोहन और पृथ्वी के मैंटल की गति ऐसे परिवर्तनों को प्रभावित कर सकती है।

कथन II सही है, लेकिन यह कथन I की व्याख्या नहीं करता। सौर ज्वालाएँ और कोरोनाल द्रव्यमान निष्कासन सूर्य से ऊर्जा, चुंबकीय क्षेत्र तथा आवेशित कण अंतरिक्ष में भेजते हैं। पृथ्वी की ओर आने पर ये पृथ्वी के चुंबकमंडल और ऊपरी वायुमंडल को प्रभावित कर सकते हैं तथा ध्रुवीय ज्योति, रेडियो-संचार में बाधा और उपग्रहों पर प्रभाव जैसी अंतरिक्ष-मौसम संबंधी घटनाएँ उत्पन्न कर सकते हैं। परंतु यह पृथ्वी के द्रव्यमान-वितरण में ऐसा परिवर्तन नहीं करते जो कथन I में वर्णित घूर्णन और अक्ष के बदलाव का कारण बने।

कथन III सही है और यह कथन I की व्याख्या करता है। ध्रुवीय हिमचादरों और हिमनदों के पिघलने पर जल उच्च अक्षांशों से महासागरों की ओर जाता है तथा उसका एक बड़ा भाग भूमध्यरेखा के निकट पुनर्वितरित होता है। इससे पृथ्वी का जड़त्व आघूर्ण बदलता है। जिस प्रकार कोई घूमता हुआ स्केटर अपनी भुजाएँ बाहर फैलाने पर धीमा हो जाता है, उसी प्रकार द्रव्यमान के ध्रुवों से भूमध्यरेखा की ओर जाने से पृथ्वी के घूर्णन में सूक्ष्म मंदता तथा दिन की लंबाई में अत्यंत छोटा परिवर्तन हो सकता है। द्रव्यमान का असमान पुनर्वितरण घूर्णन-अक्ष के खिसकने या ध्रुवीय गति में भी योगदान देता है।

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