Previous Year Question
निम्नलिखित में से किसको/किनको ‘भौगोलिक सूचना (जिओग्राफिकल इंडिकेशन)’ की स्थिति प्रदान की गई है?
बनारसी जरी और साड़ियाँ
राजस्थानी दाल-बाटी-चूरमा
तिरुपति लड्डू
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Correct Answer: C
Detailed Solution
सही उत्तर: (c) केवल 1 और 3
1. बनारसी जरी और साड़ियाँ—सही
‘Banaras Brocades and Sarees’ भारत की आधिकारिक GI Registry में पंजीकृत भौगोलिक संकेत है।
इसका GI आवेदन क्रमांक 99 है। आवेदन 4 जुलाई, 2007 को किया गया था और 4 सितंबर, 2009 को पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
इसे हस्तशिल्प की श्रेणी में उत्तर प्रदेश से संबंधित उत्पाद के रूप में पंजीकृत किया गया है।
इसके आवेदकों में बनारस बुनकर समिति तथा बुनकरों का प्रतिनिधित्व करने वाले अन्य संगठन सम्मिलित थे।
बनारसी ब्रोकेड और साड़ियाँ अपनी महीन बुनाई, रेशम, सोने-चाँदी जैसी चमक वाली जरी, पुष्प एवं बेल-बूटों और विस्तृत कलात्मक नमूनों के लिए प्रसिद्ध हैं।
GI पंजीकरण का उद्देश्य केवल नाम की रक्षा करना नहीं, बल्कि उत्पाद की भौगोलिक उत्पत्ति, परम्परागत निर्माण-कौशल और प्रतिष्ठा को भी कानूनी संरक्षण देना है।
2. राजस्थानी दाल-बाटी-चूरमा—गलत
दाल-बाटी-चूरमा राजस्थान की प्रसिद्ध पारम्परिक भोजन-परम्परा है, लेकिन प्रश्न पूछे जाने के समय इसे GI का दर्जा प्राप्त नहीं था।
इसका नाम आधिकारिक GI Registry में पंजीकृत भौगोलिक संकेत के रूप में दर्ज नहीं था।
किसी भोजन का किसी क्षेत्र में लोकप्रिय अथवा पारम्परिक होना अपने-आप उसे GI नहीं बनाता।
GI के लिए उत्पाद का औपचारिक आवेदन, उत्पादकों का प्रतिनिधित्व करने वाला आवेदक, निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र, विशिष्टता के प्रमाण और विधिक पंजीकरण आवश्यक होते हैं।
3. तिरुपति लड्डू—सही
‘Tirupathi Laddu’ आधिकारिक GI Registry में पंजीकृत है।
इसका आवेदन क्रमांक 121 है। आवेदन 31 मार्च, 2008 को तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् द्वारा किया गया था।
इसे खाद्य पदार्थ की श्रेणी में आंध्र प्रदेश से संबंधित GI के रूप में पंजीकृत किया गया और 4 सितंबर, 2009 को पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
तिरुपति लड्डू तिरुमला स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
GI संरक्षण तिरुपति लड्डू के नाम, उसकी धार्मिक प्रतिष्ठा, निर्धारित उत्पादन-परम्परा और भौगोलिक संबंध के अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग को रोकने में सहायता करता है।
GI से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य
WTO के TRIPS समझौते के अनुच्छेद 22 के अनुसार GI ऐसा संकेत है जो किसी वस्तु को किसी निश्चित देश, क्षेत्र अथवा स्थान से उत्पन्न बताता है और जिसकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा अथवा अन्य विशेषता मूलतः उस भौगोलिक उत्पत्ति से जुड़ी होती है।
भारत में GI का संरक्षण वस्तुओं का भौगोलिक उपदर्शन (रजिस्ट्रीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अंतर्गत किया जाता है।
यह अधिनियम 15 सितंबर, 2003 से लागू हुआ।
पूरे भारत के लिए GI Registry की स्थापना चेन्नई में की गई है।
GI का पंजीकरण दस वर्षों के लिए होता है और निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से प्रत्येक दस वर्ष के बाद उसका नवीकरण किया जा सकता है।
GI मुख्यतः सामूहिक भौगोलिक पहचान की रक्षा करता है; यह किसी एक व्यक्ति को उत्पाद की सम्पूर्ण परम्परा का निजी स्वामी नहीं बनाता।