JAGTIV · Previous Year Questions

UPSC

HISTORY · 2012

Previous Year Question

सदियों से भारत में जीवित रही एक प्रमुख परम्परा ‘ध्रुपद’ के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

  1. ध्रुपद की उत्पत्ति तथा विकास मुगल काल में राजपूत राज्यों में हुआ।

  2. ध्रुपद प्रमुखतः भक्ति और अध्यात्म का संगीत है।

  3. ध्रुपद आलाप मंत्रों से लिए गए संस्कृत अक्षरों पर आधारित है।

निम्नलिखित कूटों के आधार पर सही उत्तर चुनिए:

A.
1 और 2
B.
2 और 3
C.
1, 2 और 3
D.
उपर्युक्त में से कोई भी सही नहीं है

Correct Answer: B

Detailed Solution

  • कथन 1 गलत है: ध्रुपद की मूल परम्परा मुगल काल से पहले की मानी जाती है। इसका सम्बन्ध वैदिक मंत्रोच्चार, मंदिर-संगीत तथा मध्यकालीन प्रबंध-गायन की परम्पराओं से जोड़ा जाता है। पंद्रहवीं–सोलहवीं शताब्दी में ग्वालियर के तोमर शासक राजा मानसिंह तोमर के संरक्षण में इसे व्यवस्थित और परिष्कृत स्वरूप प्राप्त हुआ। बाद में इसे मुगल और राजपूत दरबारों का संरक्षण मिला। इसलिए इसकी उत्पत्ति को मुगल काल के राजपूत राज्यों तक सीमित करना सही नहीं है।

  • कथन 2 सही है: ध्रुपद हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्राचीनतम जीवित गायन-शैलियों में से एक है। इसकी प्रकृति गंभीर, ध्यानप्रधान और आध्यात्मिक है। इसकी अनेक रचनाएँ देवी-देवताओं की स्तुति तथा भक्तिपरक विषयों पर आधारित हैं, यद्यपि कुछ ध्रुपद रचनाएँ राजाओं की प्रशंसा, वीर रस और अन्य विषयों से भी सम्बन्धित हैं।

  • कथन 3 सही है: ध्रुपद की प्रस्तुति सामान्यतः विस्तृत आलाप से प्रारम्भ होती है। यह आलाप प्रारम्भ में ताल-रहित होता है और इसमें राग का क्रमिक विस्तार किया जाता है। इसके लिए ‘नोम’, ‘तोम’, ‘ना’, ‘रे’, ‘री’, ‘ते’ और ‘ता’ जैसे अक्षरों का प्रयोग होता है। परम्परागत रूप से इन अक्षरों को ‘ॐ’, ‘अनन्त’, ‘हरि’ और ‘नारायण’ जैसे मंत्रात्मक संस्कृत शब्दों से निकला हुआ माना जाता है।

  • आलाप के बाद ध्रुपद की बंदिश प्रस्तुत की जाती है, जिसमें सामान्यतः पखावज की संगत होती है। ध्रुपद रचना के चार पारम्परिक भाग स्थायी, अंतरा, संचारी और आभोग माने जाते हैं, हालांकि आधुनिक प्रस्तुतियों में प्रायः स्थायी और अंतरा ही प्रमुखता से गाए जाते हैं।

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