Previous Year Question
कुचिपुडी तथा भरतनाट्यम नृत्यों के बीच क्या भेद है?
कुचिपुडी नृत्य में नर्तक प्रासंगिक रूप से कथोपकथन का प्रयोग करते हैं, जबकि भरतनाट्यम में कथोपकथन का प्रयोग नहीं किया जाता।
पीतल की तश्तरी की धार पर पाद रख नृत्य करने की परम्परा भरतनाट्यम की विशिष्टता है, जबकि कुचिपुडी नृत्य में इस प्रकार की क्रियाओं का कोई स्थान नहीं है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Correct Answer: A
Detailed Solution
कथन 1 सही है: कुचिपुडी की उत्पत्ति आंध्र प्रदेश की नृत्य-नाट्य परम्परा के रूप में हुई। इसमें नृत्य के साथ अभिनय, संगीत तथा वाचिक अभिनय का भी प्रयोग होता है। पात्रों का परिचय देते समय अथवा कथा को आगे बढ़ाते समय नर्तक कभी-कभी संवाद बोल सकते हैं। इसके विपरीत, भरतनाट्यम के मानक प्रदर्शन में नर्तक सामान्यतः स्वयं संवाद नहीं बोलता, बल्कि हस्त-मुद्राओं, मुखाभिनय और शारीरिक गतियों के माध्यम से कथा तथा भाव व्यक्त करता है।
कथन 2 गलत है: पीतल की तश्तरी की धार पर पैर रखकर नृत्य करना भरतनाट्यम नहीं, बल्कि कुचिपुडी की विशेषता है। कुचिपुडी की इस प्रस्तुति को तरंगम कहा जाता है। इसमें नर्तक पीतल की तश्तरी के किनारों पर संतुलन बनाते हुए लयबद्ध पद-संचालन करता है। कभी-कभी सिर पर जल से भरा पात्र रखकर भी यह नृत्य किया जाता है।
तरंगम में प्रयुक्त गीत सामान्यतः नारायण तीर्थ की ‘कृष्ण लीला तरंगिणी’ से लिए जाते हैं, जिसमें भगवान कृष्ण के जीवन से सम्बन्धित घटनाओं का वर्णन है।
अतः प्रश्न में पीतल की तश्तरी वाली परम्परा को भरतनाट्यम से जोड़कर उलट दिया गया है।