Previous Year Question
भारत में बौद्ध इतिहास, परम्परा और संस्कृति के सम्बन्ध में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
विख्यात तीर्थस्थल | अवस्थान |
1. टाबो मठ और मन्दिर संकुल | स्पीति घाटी |
2. ल्होत्सव लाखांग मन्दिर, नको | जंस्कार घाटी |
3. अलची मन्दिर संकुल | लद्दाख |
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
Correct Answer: C
Detailed Solution
युग्म 1 सही है: टाबो मठ और मन्दिर संकुल—स्पीति घाटी
टाबो मठ हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की स्पीति घाटी में स्थित है।
इसकी स्थापना वर्ष 996 ई. में पश्चिमी हिमालय में बौद्ध धर्म के पुनरुत्थान के समय हुई थी।
इसकी स्थापना को विद्वान-अनुवादक रिनचेन जंगपो और पश्चिमी तिब्बत के गुगे राज्य के शासक येशे-ओ के संरक्षण से जोड़ा जाता है।
मठ में मिट्टी से निर्मित मंदिर, स्तूप, भित्तिचित्र, पाण्डुलिपियाँ और मृण्मूर्तियाँ मिलती हैं।
प्राचीन भित्तिचित्रों और कलात्मक सम्पदा के कारण इसे कभी-कभी ‘हिमालय का अजंता’ कहा जाता है।
अतः युग्म 1 सही है।
युग्म 2 गलत है: ल्होत्सव लाखांग मन्दिर, नको—जंस्कार घाटी
नको हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले की हांगरंग घाटी में स्थित है।
यह जंस्कार घाटी में स्थित नहीं है। जंस्कार वर्तमान लद्दाख का एक क्षेत्र है।
नको मन्दिर समूह का प्रमुख मंदिर ल्होत्सव लाखांग अथवा ‘अनुवादक का मंदिर’ है।
‘ल्होत्सव’ या ‘लोत्सावा’ का अर्थ विद्वान-अनुवादक होता है और इस मंदिर का नाम रिनचेन जंगपो से संबंधित है।
नको के मंदिरों में लगभग 11वीं–12वीं शताब्दी के भित्तिचित्र और बहुरंगी मृण्मूर्तियाँ मिलती हैं।
अतः स्थान गलत दिए जाने के कारण युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है।
युग्म 3 सही है: अलची मन्दिर संकुल—लद्दाख
अलची मन्दिर संकुल लद्दाख के लेह जिले में सिंधु नदी के निकट अलची गाँव में स्थित है।
इसे अलची चोस्कोर अथवा अलची गोम्पा भी कहा जाता है।
इसके प्रमुख मंदिरों में दुखांग, सुमत्सेक, मंजुश्री मंदिर और लोत्सावा लाखांग सम्मिलित हैं।
यह अपने प्राचीन बौद्ध भित्तिचित्रों, विशाल प्रतिमाओं और उत्कृष्ट काष्ठ-नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।
इसके भित्तिचित्रों में कश्मीर और पश्चिमी हिमालय की कलात्मक परम्पराओं का प्रभाव दिखाई देता है।