Previous Year Question
भारत के एक विशेष क्षेत्र में, स्थानीय लोग जीवित वृक्षों की जड़ों का अनुवर्धन कर इन्हें जलधारा के आर-पार सुदृढ़ पुलों में रूपान्तरित कर देते हैं। जैसे-जैसे समय गुज़रता है, ये पुल और अधिक मज़बूत होते जाते हैं। ये अनोखे ‘जीवित जड़ पुल’ कहाँ पाये जाते हैं?
Correct Answer: A
Detailed Solution
जीवित जड़ पुल मेघालय की विशिष्ट पारंपरिक जैव-अभियांत्रिकी के उदाहरण हैं। इन्हें स्थानीय रूप से जिंगकिएंग ज्री (Jingkieng Jri) कहा जाता है।
मेघालय के खासी और जयन्तिया समुदाय भारतीय रबर वृक्ष—फाइकस इलास्टिका (Ficus elastica)—की जीवित जड़ों को जलधाराओं के आर-पार निर्देशित और परस्पर गूँथते हैं।
जड़ों को सहारा देने के लिए बाँस अथवा अन्य ढाँचों का उपयोग किया जाता है। समय के साथ जड़ें मोटी होती हैं और आपस में जुड़कर पुल को अधिक मजबूत बनाती हैं।
इनका निर्माण किसी एक समय में पूरा नहीं होता; इनका विकास, पोषण और रखरखाव कई पीढ़ियों तक चलता है।
ये पुल केवल आवागमन के साधन नहीं, बल्कि स्थानीय सामुदायिक ज्ञान, पर्यावरण-अनुकूल अभियांत्रिकी और मानव-प्रकृति सहयोग के उदाहरण हैं।
UNESCO के अनुसार ये जीवित संरचनाएँ मेघालय के 75 से अधिक दूरस्थ गाँवों में संपर्क और आपदा-प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती हैं।